समझ
मेरी ख़्वाईसो की क्या है क़ीमत,नहीं समझेगा। जवाँ है,अभी ग़ुरूर में है,मोहब्बत नहीं समझेगा। किसी नामुराद पे वक़्त,भला क्यूँ' जाया करना। जो दिमागदार है,दिल को'ग़नीमत नहीं समझेगा। उसको शिकायत हैं यहाँ,खुद ही जमाने भर की। औरों के दिल की आरजू,ज़रूरत नहीं समझेगा। दुआ में भी,वो फलक ही'हमेशा मांगता रहता हैं। भला जमीं की अहमियत,हक़ीकत नहीं समझेगा। अब इस दौड़ में यहाँ,भरोसे की उम्मीद ना कर; ठुकराने से पहले,पाने की ज़हमत नहीं समझेगा। ये तेरा फ़ैसला हैं,अपने घर को'जैसे भी हो उजाड़े; बटवारें कि हनक में'माँ की,खैरीयत नहीं समझेगा। तेरे साथ चलकर भी,दोस्त'अब फ़ायदा क्या होगा। जो ख़ुदा को नहीं समझा,मेरी चाहत नहीं समझेगा। अभी नए दौड़ का इश्क़ हैं,बग़ावत करके मानेगा। ये दिल' दुष्वारियों को,खूनी शरीयत नहीं समझेगा।