संदेश

दिसंबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दिल की बात

 ख़ैर छोड़िए, दिल की बात'कहाँ तक जाएगी। आप ही बर्बाद होंगे,वो लड़की मुस्करा कर जाएगी। वक़्त को समझिए,खुद को ख़ूब निखारिए यहाँ; वर्ना जिंदगी एक दिन,तुझें ठेंगा दिखा कर जाएगी। कोई उम्रभर यहाँ,ज़नाब'अब साथ निभाता नहीं; ये साथ रहने की ज़िद,और फासला बढ़ाकर जाएगी। फूल जो कभी,यहाँ अपनी माली का हैं हुआ नहीं; भौरें ये सोचते है के सबका,दिल बहलाकर जाएगी। ये जो कश-म-कश हैं, तुझकों कहीं का न छोड़ेगी; तुझकों अकेला छोड़कर,वो कारवाँ बढ़ाकर जाएगी। औऱ कुछ न हो,मग़र ये ईश्क़ में' मुमकिन हैं यहाँ; अगर करोगें ईश्क़,तो'ये तुमकों आज़माकर जाएगी।

देखा

 चेहरा नहीं,हुनर नहीं,ज़िगर नहीं देखा। क्या देखा ग़र तुमनें उसे,जीभर नहीं देखा। जहाँ तक मिलें तुम्हें,सादगी पसंद लोग; समझना'गाँव है,तुनें अभी शहर नहीं देखा। ताक़ में रही उम्र,जिसके एक नज़र के लिए; उसनें पलटकर हमें,यहाँ इक नज़र नहीं देखा। सिसकियाँ जिनके छाँव तलें,खिलखिलाने लगें; मिला न हो ऐसा घर,तो'तुमनें घर नहीं देखा। ख़्वाब इतने थे की,वो हर बार ही छला गया; हमनें फूल की तलाश में,राह का पथ्थर नहीं देखा। मिला अगर बसंत,तो'यही जिंदगी का अंत नहीं; बयाँ जिंदगी न करीए,ग़र पतझड़ नहीं देखा।