संदेश

अक्टूबर, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सागर

 हर हर्फ़ को बड़े सलीके से,अपनी जुबानी कहता हैं। सागर ईश्क़ लिखता हैं,तो'हर शेर रूहानी कहता हैं। रोता हैं ज़मीं की प्यास में,जब ये बावरा आसमान; बदरी की पिघलन को,जमाना सिर्फ़'पानी कहता हैं। प्यार तो सबको हुआ है,यहाँ मर्तबा दो मर्तबा,मग़र' वो हर इक एहसास में,यहाँ सैकड़ो कहानी कहता हैं। दुनिया से ताल्लुक,तुम भी रखते हो'हम भी रखतें है; इश्क़ जब बोलता हैं,तो'बातें सारी आसमानी कहता हैं। खुद्दार लोगों के महफ़िल की रौनक,हमेशा रहीं गज़ल; भला नए दौड़ में कौन,इस तरह बात पुरानी कहता हैं। शब्दों को जोड़कर,हम रोज नया एहसास बनातें हैं; दुनिया हमें पागल,हमारी हरकतें बचकानी कहता हैं।