लाचारी
पैर बंधे,हाथ खाली,सर पर'सौ जिम्मेदारी होती हैं। यूँ ही छूट नहीं जाता ईश्क़,कुछ तो'लाचारी होती हैं। माँ का ख़्याल रखना हैं,भैया की उम्मीद भी रखनी हैं; वादा किया है मिलनें का,उनकी ज़िद भी रखनी हैं। कई उलझन होते हैं,जब दिल की बीमारी होती हैं। यूँ ही छूट नहीं जाता ईश्क़,कुछ तो'लाचारी होती हैं। घर से हमें निकालों नहीं,कुछ फूल पसंद तो आयेंगे ही। पापा इस अंजुमन में,कुछ मकबूल पसंद तो आयेंगे ही। कैसे मैं समझाऊँ,दिल पर न'सबकी दावेदारी होती हैं। यूँ ही छूट नहीं जाता ईश्क़,कुछ तो लाचारी होती हैं।