संदेश

सितंबर, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बदमिज़ाज़

तुम अपने आप को,यूँ न'यहाँ ग़म-ज़दा रखा करों।, मैं बदमिज़ाज हुँ मुझसे,ज़रा फ़ासला रखा करों।            तिनका जोड़ कर,ब-मुश्किल पैसा कमाया हैं हमनें। औलाद अग़र बिगड़ैल है,तो'उसे भी खफ़ा रखा करों। चाँदनी छत की साहेब,रही कभी मोहताज़ नहीं हैं; आयेगी चौखट पर भी,ज़रा तुम हौसला रखा करों। वो वक़्त चिठ्ठियों का दोस्त'बहुत माकूल गुज़रता था; रिस्ता रखना ही है,तो'ज़रा दूरियों का मज़ा रखा करों। कौन मेरी तरह यहाँ,दिल की बात बताएगा,ज़ानिब' सच अगर सुनना है,तो'अपनी सच्ची जुबाँ रखा करों। जो तेरा हैं तुझसे यहाँ,भला कोई छीन नहीं पाएगा; हालात जैसे हो,मेरे दोस्त'खुदपर,भरोसा रखा करों। तुमको यक़ीनन दुनियाँ,दोस्त'मेरी तरह ही दिखेगी; पाकीज़गी नज़रों की,यहाँ तुम हर दफ़ा रखा करों। ज़माने के भीड़ से इतर,दोस्त'इक जिंदगी और भी हैं; तुम्हें शर्मिंदगी न हो हमेशा,ऐसा फ़ैसला रखा करों। अमीर लोग जो पैसे से ,यहाँ हक़ीकत भी बदलते हैं। हैं अगर हिम्मत,तो'कहो उनसे अलग ख़ुदा रखा करों। उससे बेहतर नहीं दोस्त,ना ही दुश्मन यहाँ मिलेगा। भाई परदेस भी हो,तो'हमेशा उसका हिस्सा रखा करों।

मतलब

 सबको हैं यहाँ,उसके ही सरोकार से मतलब। अब उससे ही यहाँ दोस्त, हैं प्यार से मतलब। साहेब हमको यहाँ नहीं है,अब फिक्र जमाने की; उसके खबरों के लिए,रखते हैं अख़बार से मतलब। खुद को भूला कर,जी रहा था ख़्याल में जिसके; बोली अकेले से नहीं,मुझें है पूरे चार से मतलब। ईश्क़ भी उसूलों से यहाँ,वो कर रहा है ज़ाहिल;  दिल को तो बस होता हैं,साहेब'ऐतबार से मतलब। मैंने जो पूछा नाम तो,वो बोली हमसें मुस्कुराकर; चेहरें में क्या हैं,हमकों है बस कारोबार से मतलब। शोहरतों से बाहर निकलकर,ज़रा देखिए ज़नाब; किस-किस को हैं यहाँ,आपके क़िरदार मतलब।                 

मर्द

 सिर्फ़ कुदरती वनावट से, क्यों कोई तुम्हें मर्द समझें। किसी का दर्द समझा हैं, कोई तेरा भी दर्द समझें। जमानें कुछ भी समझें हमें  अब कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता; मज़ा तो तब है यहाँ, जब' वो भी मुझें हमदर्द समझें। मैं आँखरी चाल में भी, यहाँ दाँव पलट सकता हूँ; पड़ी है जो गर्द हमपर, उसी से ना हमें गर्द समझें। सिर्फ हवाओं के चलने से; यहाँ मौसम नहीं बदलते। हो जब आँख में आँसू, तभी फिज़ा को सर्द समझें।