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घर

जहाँ मेरी यादों का,यहाँ बचपन गुज़रा हैं, चंद पैसों की ख़ातिर,वो घर थोड़े बदलेंगे। भले जान के दुश्मन हज़ार,हो जाए यहाँ मेरे' किसी हाल में'अपना शहर थोड़े बदलेंगे। सुना हैं,कुछ लोग यहाँ,मेरी आँख निकालेंगे; हम मजनूँ हैं साहेब,अपनी नज़र थोड़े बदलेंगे। वो किसी हाल में इस दिल से,निकलता नहीं, ज़माने के वास्ते,अपना जिगर थोड़े बदलेंगे। थोड़ा हौसला सनम,अब तुम भी आज़माओ; खुदा सिर्फ हमारे लिए,ये मंजर थोड़े बदलेंगे। तेरी चाह में इस कदर,अब बदनाम हो गए हैं; तुझें भूल भी जाए,तो'ये ख़बर थोड़े बदलेंगे। मंजिल का मुन्तजिर हुँ,कोई आवारा नहीं हुँ; रास्तें के डर से,हम अपना सफ़र थोड़े बदलेंगे। तकलीफ़ ये हैं,यहाँ फूलों ने मिज़ाज बदला हैं; वो तो चुभेंगे ही,कम्बख़्त ख़ंजर थोड़े बदलेंगे। जो सिकंदर थे,नज़र के तलबगार बने बैठे हैं; हालात इससे भी ज्यादा,बद्दतर थोड़े बदलेंगे।

सुकूँ

जो यहाँ मुकद्दर में है,बस वही मिलेगा। अमीरी की जुगत में हो,सुकूँ नहीं मिलेगा। ख़्वाब छोटे पालिए,जीने के हीसाब से; जो गलत लगता हैं,तुमको सही मिलेगा। बचपन में जिसने,हिस्से की रोटी खिलाई थी, देखना जिंदगी दौड़ में,वो दूर कहीं मिलेगा। जब नौकरों के बीच गुजरेगी,जिंदगी तुम्हारी; तुमको तब लगेगा,बस यहीं जिंदगी मिलेगा। हमारी बात पर फिर हँसेंगे,ये जमाने वाले; कहेंगे पागल है,इन राहों पे'मुफ़लशी मिलेगा। बाबर के घरवाले भी,पकौड़े छानते हैं अब; ये दौलत हैं,हमेशा होकर' अज़नबी मिलेगा।

बदला

यहाँ हर मोड़ पर,चोट खाएँ मग़र' न जीने का,कभी हौसला बदला। कभी फैसलें ने,ये जिंदगी बदली, है जिंदगी ने,कभी फ़ैसला बदला। जब किनारों से दोस्ती हो गई तो', लहरों ने भी,यहाँ है रास्ता बदला। ज़ख्म इतना ही,दोस्त'कम न था तुमने आकर,सारा मसला बदला। मेरे कातिल,तफ़्तीश को आए हैं; वो ना समझेंगे,है यहाँ क्या बदला। नब्ज़ खुद की जब,मैं टटोलता हुँ; मंजील से हर बार,हैं वास्ता बदला। हर बरसात में,मौसम से जुझता हैं; भला चिड़ीयें ने कब,घोसला बदला।