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तेरे वग़ैर

तुम हो तो तेरे संग,तुझे खोने का भी गम हैं। तेरे वग़ैर जिंदगी में,थोड़ी मोहब्बत ही तो कम हैं।         मैं खुश हुँ ऐ दोस्त,यहाँ अपने हालात पे।         कुर्बा नही होना,चन्द लम्हों में किये बात पे।         गुजरते वक़्त के साथ ही,ऐसे मंजर हो जाते हैं।         ठोकरे खाकर ही,जो नाजूक है पथ्थर हो जाते हैं।         पथ्थर दिल आदमी भी,भरोसे के कायल होते हैं।         मोहब्बत वो तीर है,एक बार मे ही'कई घायल होते हैं। जिसे समझता प्यार तु,होता आँखों का भरम हैं। तुम हो तो तेरे संग, तुझे खोने का भी गम हैं।।         ना समझ तेरे लिए,दिल मे जज़्बात नहीं है।         मग़र जिंदगी दोस्त,सिर्फ चन्द ख्यालात नहीं हैं।         उम्र गुजर जाती हैं, कइयों को रूठने मनाने में।         बड़ी जद्दोजहद हैं, दिल के रिश्ते को निभाने में।         इश्क़ वो दरीया हैं,जहाँ किसी को साहिल नहीं मिलता। ...

कश्मीर

जब कायरता के दामन में, बीरता हुँकार भरेगी। जब लाहौर की गलियों से,गंगा की धार बहेगी। जब जिन्ना के वंसज सारे,माथे तिलक लगाएंगे। भारत माँ के चरणों में,जब अपना शीश झुकायेंगे। तब तू मांगना तुझको,ये सीना चीर दे दूँगा मैं। पंजाब,हिमाचल संग तुझको कश्मीर दे दूंगा मैं।।               जब अबला न कोई नारी,न पेट किसी की खाली हो।         जब औरों के तोपों से ना, तेरे घर की रखवाली हो।         चैन-सुकूँ से जब बच्चें,देश में तेरे यहाँ सोने लगें।         तेरी माँ की कोखों से भी,भगत-आजाद होने लगें। तब करना लड़ने की बातें,वर्ना चित फिर दे दूँगा मैं। पंजाब,हिमाचल संग तुझको कश्मीर दे दूंगा मैं।।          जब बोल-बम के नारों से,तेरा भी सरोकार रहे।          जब केशरियाँ रंग में रंगने को,कराँची तैयार रहे।          जब हिमालय तेरी आँगन में,आकर पावँ पसारे।          तेरी संसद से भी गूंजे,ज...

बेटी

अगर समझते सभी रिस्तों कि मर्यादा, होकर यहाँ लोग,कलंकित नहीं रहते। अगर पिता कि बातें'तु मान लेती बेटी, तो तेरे पिता आज,ससंकित नही रहते। तु अभी देख,दुनिया को मेरी आँखों से, कौन बुरा है,चेहरे पे' अंकित नही रहते। अगर सभी के दिल में'खुदा बसता होता; आज कई रिश्ते,होकर लंछित नही रहते। लुटती है और भी चीज,पैसे के सिवा भी' यौवन भी उम्रभर यहाँ,संचित नही रहते। हर ज़ुर्म कि सज़ा'अगर मिल ही जाती तो, इज्ज़त से खेलनेवाले, मंचित नही रहते। उम्र के इस पड़ाव में,तु बेबाक़ न रहा कर; मैं ठहरा बाप तेरा,कैसे चिंतित नही रहते। बहुत कुछ पाना नहीं,बेटी तुझको गवांकर; आबरू बची रहे बस,वो किंचित नही रहते। तितलियों से भी यहाँ,लोगो को शिकायत हैं; हैं मुश्किल ये कहना,कहाँ भक्षित नही रहते।

बेटा

कपड़े फ़टे हैं पापा के,बेटे को campus शूज़ हैं। आँखों पे है रेबेन का चश्मा,भले बाप की पैंट लूज़ हैं। पैरों में ठेले हैं पर गए,फिर भी परहेज़ हैं टेम्पू भाड़े से। बेटा बख्शीश दे आता हैं, इक ठुमके पे हजारों में। साइकिल चलती ऐसे पापा की,जैसे चक्कों का एहसान हैं। बीयर और मुर्गा का चलना, बेटे की पार्टी की शान हैं। पापा खाए सादी रोटी,बेटा बर्गर का शौक़ीन हैं। पापा के पैसे पर,घर में मची लूट हाय क्या सीन हैं। पापा है स्कूटर veshpa,बेटा cbz xtream हैं। पापा के पैसे पे बनाता,रोज़ बिजनेस के नए थीम हैं। पापा पूछे कंप्यूटर तो कहता,लैपटॉप का जमाना हैं। मम्मी कहती दूध पिले बेटा,तुझे जीम क्लास भी जाना हैं।। जिम क्लास क्या होता हैं,श्रीमती ज़रा हमको समझाओ। कोर्स अभी तक पिछड़ा हैं,क्यूँ पैसे देकर हड्डी तुरवाओ।     

रिश्तें

अक्श आँखों में,यूँ ही छिपा लेते हैं। चन्द रिश्ते हम,ऐसे भी बना लेते है। तुम रहते हो,हमेशा दिल के ताबूतों में' हम जिसे चाहें,आंखों में बसा लेते हैं। हालात दिल के,माकूल हो न हो;मग़र' हम कई रिश्ते,शब्दों से'निभा लेते हैं। मेरी हर शाम यूँ,रंगीन होकर गुजरती हैं। हम तो अपने,जख्मों का भी मज़ा लेते हैं। अफ़सोस उनका क्या,जो हमारे ना हुए; हम तो गैरों से भी,यहाँ रंग जमा लेते हैं। जो दिल को अच्छा लगें,याद वही रखते हैं, बाकी सब गिलें-शिकवे,हम भुला देते हैं।

भाई

चन्द यादों को आंखों में समेटें हुए, कहीं किसी रोज,उसका पैगाम आ जाए।। घर बनाना तो'इक कोना भाई का भी रखना, क्या पता कब वो तेरे काम आ जाए।।     पिता कि दौलत की,वो भी इक निशानी हैं।     संग बचपन है बीता,संग बीती जवानी है।     माना तेरी दौलत पे,हक़ उसका नहीं है;     उसके खिलौनें पे की,तुमने भी मनमानी है।     घर की बातें तेरे कारण ही,न सरेआम आ जाए। घर बनाना तो'इक कोना भाई का भी रखना, क्या पता कब वो तेरे काम आ जाए।।    बड़ा हैं तो पगड़ी है,छोटा है तो शान हैं वो।    तेरी दरकती दीवारों का भी,निगेहबान हैं वो।    साथ रहेगा तो कंधे का बोझ कम कर देगा।    उसके बिना जमाना,तेरा ओज कम कर देगा।    कई उम्मीदों के सहारे,किसी शाम आ जाए। घर बनाना तो इक कोना भाई का भी रखना, क्या पता कब वो तेरे काम आ जाए।।     दुश्मन भी बड़ा है, दोस्त भी अलबेला है।     ज़िद्दी भी है मग़र, तुझे न छोड़ा अकेला है।     पिता की दौलत के लिए माना तुझसे लड़ेगा।     मग़र संभालेगा तुम्...

याद

जिंदगी करेगी,ये मौत से फ़रियाद। मेरी याद आएगी,मेरे जाने के बाद।।       होगा ये समाँ, होंगे सारे नजारे।       ना होंगे हम सिर्फ़, होंगे ये सितारे।       फिर भी तुम्हें मेरी,याद सताएगी।       चैन होगा तुझे पर नींद नही आएगी। भूल के न भूल पाओगे,मेरा तुम साथ। मेरी याद आएगी,मेरे जाने के बाद।।       ये दौलत ये शोहरत,पलभर का साथ है।       यहाँ वही तेरे अपने है,जो तेरे साथ हैं।       हमें ठुकरा के तुम,चैन कहाँ पाओगे।       हमसे दूर रहकर भी,हमे याद आओ। ये शोहरत ये दौलत सब,हो जाएगी बर्बाद। मेरी याद आएगी,मेरे जाने के बाद।।       ज़िन्दगी का क्या,ये ख़ुदा कि अमानत हैं।       खोने कि मजबूरी,बहुत पाने कि चाहत है।       समझ के भी कोई इसे, समझ न पाए।       क्या पता हवा का कब रुख बदल जाए। समझ सको तो समझ लो,तुम मेरे जज्बात। मेरी याद आएगी, मेरे जाने के बाद।।       

दिल

होती हैं मोहब्बत,जब धड़कता हैं दिल। किसी कि चाहत में जब,बहकता हैं दिल।।        न समझो हमें की, हम नादान हैं।        मेरी भी हुस्नवालों से,बहुत पहचान हैं।        मगर सभी से' नहीं होती दिल्लगी।        करे किससे मोहब्बत,ये सोच परेशान हैं।        इन बातों में हरपल,उलझता हैं दिल। होती है मोहब्बत,जब धड़कता हैं दिल। किसी कि चाहत में जब,बहकता हैं दिल।।        मुश्किलें आती ही है,मोहब्बत कि राहों में।        जब अच्छे लगते है,हम किसी कि निग़ाहों में।        तब जाकर चाहत परवान चढ़ती हैं।        छिपाने से और भी,मेरी जान बढ़ती हैं।        अपनी निगाहों को खूब,समझता है दिल। होती है मोहब्बत,जब धड़कता है दिल। किसी कि चाहत में,जब बहकता हैं दिल।।        जो न समझे मोहब्बत को,नादां दिल हैं।        नहीं बोलता है, होता ये बेजुबां दिल हैं।      ...

जान

कभी मेरे भी घर में,यहाँ ख़ूब लगतें थे मेले;  वहां महफ़िल सजती थी,जहाँ श्मशान लगता है।                 क्या रिश्ता था मेरा,जाकर उसी से पूछ लेना तुम, मेरी वो जान लगती थी,जिसकी तु जान लगता हैं। चला है बीच दोपहरी में,अपने महबूब से मिलने  दिलवर का टुटा छप्पर भी,आलिशान लगता है।        बिना दिल के देखे,कैसे दिलवर मान बैठी वो; गजब है शादी का रिश्ता,खुदा बेईमान लगता है।   है ये कैसी मोहब्बत तेरी,भला अब तू ही जाने  जो हर पल हंसती रहती थी,परेशान लगता है।                 था चेहरे पे फ़िदा,ज़रा दिल भी' देख लेता तु;  जो ज़िस्म में रहकर भी,उससे अंजान लगता हैं।    तू ठहरा अमीर पैसें का,दिल का मोल क्या जाने हो सोने का पिंजरा भी,तो पंछी बेजान लगता है।       तू अबतक ख़ुशी का,दोस्त'मतलब नहीं समझा। आदत हो घोसले की तो,महल वीरान लगता है।  मेरा चेहरा देख,तु खुद को खुबसूरत मान बैठा, दिल भी देख लेता,जो उसका कद्रदान लगता है।     हमन...

ग़ुरूर

क्यूँ अपने हुस्न पे,इतना ग़ुरूर करती हो। तु भी किसी से,मोहब्बत जरूर करती हो।।       क्यूँ छिपाती है,अपने चाहत के रंग हजार।       तेरी नजरों में देखा है,हमने किसी का प्यार।       कौन ख़ुशनसीब है वो'ज़रा मुझको ये तो बता।       किसी को चाहते रहना,ये भी कोई खता है क्या।       जो ख़ुद को भूलने को मुझे मजबूर करती हो। क्यूँ अपने हुस्न पे,इतना ग़ुरूर करती हो। तु भी किसी से,मोहब्बत ज़रूर करती हो।।       इक फिज़ा में होते है,सनम फ़साने अनेक।       सनम तेरी महफ़िल के,हम भी है दीवाने एक।       क्या बुरा किया जो तुझे चाहा है बेखबर।       क्यूँ मेरी नजरों से,तुझे लगने लगा है डर।       चाहतों के सफर में,आँखें अक्सर कसूर करती हैं। क्यूँ अपने हुस्न पे,इतना ग़ुरूर करती हो। तु भी किसी से,मोहब्बत ज़रूर करती हो।।        तु बाहर निकल,अपने हुश्ने-ग़ुरूर से।        पाला पड़ा है तेरा भी,किसी मग़रूर से।     ...

नज़र

वो इक नज़र में मेरा,क्या से क्या ले गए। छोड़ के सारी उल्फ़ते,वो दर्दे-बयाँ ले गए। उनसे मिली नज़र,तो बड़ी मुश्किलें हुई; मेरे सामने से, मेरा दिल उठा के ले गए। ले जाना था तो'सब ले जाते चुपके से, वो मेरा सबकुछ,मुझको ही बता ले गए। क्या अदा थी यारों,उनके भी लुटने कि, वो लुटकर मेरा दिल,मुस्करा कर ले गए। अब फिज़ा में भी,उतनी रँगीनीयत नहीं; वो सारी खुशबू,सारी ताजी हवा ले गए। मिले जो इक बार'मत पूछो क्या हुआ, कुरेद के जख्मों को,उनकी दवा ले गए। बड़ा मीठा था दर्द,जो उसने दिया था; मग़र हमसे,दर्द में जीने कि'अदा ले गए। बड़ी मासुमियत छिपी थी,उनके चेहरें में; मग़र वो दर्द सारा,सीने में छुपा ले गए। देखा था पहली बार'उनको बड़ी भीड़ में, भीड़ से चुराकर,सारी शर्मो-हयाँ ले गए। शिकवा नही,जो मिले जिंदगी में इक बार; शिक़वा हैं,जो कई बार मिलकर दगा दे गए।

शायर

मै लिखता हु,मगर हुँ शायर तो नहीं ! लाख उफने भी नदी, होती सागर तो नहीं !!      बस दिल कि बात को, पन्नो पे उतारा हमने !      अपनी जज्बातों को दिया,शब्दों का सहारा हमने !      क्या करे कोई जब,दिल कि बात दिल से निकले !      रोक सकता है कोई कैसे,हम बातो से फिसले !      अपनी कहें से मुकर जाऊ,मै इतना कायर तो नहीं ! मै लिखता हु,मगर हुँ शायर तो नहीं! लाख उफने भी नदी, होती सागर तो नहीं !!      चंद शब्दों में सारे जज्बात निकाले कैसे !      गम है बहुत सारे, ये दिल भी संभाले कैसे !      क्या करे कोई कौन यहाँ,हाल-ए-दिल समझेगा !      कोई मुझपे हँसेगा, तो कोई काहिल समझेगा !      जो हाल दिल के अन्दर है वो बाहर तो नहीं ! मै लिखता हुँ, मगर हुँ शायर तो नहीं ! लाख उफने भी नदी, होती सागर तो नहीं !!      लिखता हुँ हुस्न को,तो लोग ये कहते है !      हम भी किस...

अरमाँ

मैंने देखा है पैसों तले,अरमाँ को कुचलते हुए। अपने ख्वाबों को,आँसुओ के सहारे निकलतें हुए।।        मिलता नहीं था चैन,नींद आती नही थी रातों को।        दिल दुखता था सुनकर,ज़माने भर कि बातों को।        फिर भी संभालते थे,खुद को दिलाशा देते थे।        मेरे अपने'बनाके तमाशा,मेरा तमाशा देखते थे।        हमने देखा है चंदा कि नरमी से तपते सुरज पिघलते हुए। मैंने देखा है पैसों तले,अरमाँ को कुचलते हुए। अपने ख्वाबों को,आँसुओ के सहारे निकलतें हुए।।       कोशिशें होती थी,मगर मिलती नही थी कोई मंजिल।       हर पल हर घड़ी,टुटता रहता था मेरा दिल।       नजरें थकती थी मगर,कदम कभी रुकते नही थे।       बिखरते थे मेरे ख्वाब,पर इरादे टुटते नहीं थे।       घोड़ निराशा में भी देखा हैं,उम्मीदें के दिए जलते हुए। मैंने देखा है पैसों तले,अरमाँ को कुचलते हुए। अपने ख्वाबों को,आंसुओं के सहारे पिघलते हुए।।       देखते नही थे ...

मंज़र

टूटता हूँ शीशे कि तरह, सपने की तरह बिखर जाता हुँ !   देखता हूँ फिर वही मंजर,   जब मै अपने घर को जाता हुँ !     हर तरफ रहता है,अपने लोगो का ही घेरा     फिर भी आँखों के सामने,रहता है अँधेरा     इनमे कौन अपना है,पहचान नहीं पाता हुँ।         टु टता हुँ शीशे कि तरह, सपने की तरह बिखर जाता हुँ! देखता हूँ फिर वही मंजर जब मै अपने घर को जाता हुँ !     जीवन के राहों में कितने है मुश्किलें     बस ये उम्मीद है,कही तो होंगे फुल खिले     इसी उम्मीद में जीता चला जाता हुँ ! टूटता हूँ शीशे कि तरह, सपने की तरह बिखर जाता हुँ ! देखता हूँ फिर वही मंजर, जब मै अपने घर को जाता हुँ !!       किसी की फिक्र होती है, मेरी पढाई का       कोई ताने देता है, मुझको मेरी लराई का       क्या दिल में है मेरे,समझा भी नहीं पाता हुँ ! टूटता हूँ शीशे कि तरह, सपने की तरह बिखर जाता हुँ ! देखता हूँ फिर वही मंजर, जब मै अपने घर को जाता हुँ !!       ...

मंजील

मंजिल की तमन्ना जाग गयी,  रुकने का कोई इरादा नहीं बस कुछ पल और चल तु राही,  अब मंजिल दूर ज्यादा नहीं       कट जाएगा ये लम्हा भी,जैसे और लम्हे बीते है !       जो मुश्किलों में आगे बढे है, वे ही हर जंग जीते है!       मर जाना, मिट जाना पर,अब हार हमें स्वीकार नहीं       क्यों घबराता है राही,क्या मंजिल से तुझे प्यार नहीं       टूट जाए जो राहो में,वो होता वीरो का इरादा नहीं। मंजिल की तमन्ना जाग गयी,  रुकने का कोई इरादा नहीं। बस कुछ पल और चल राही,  अब मंजिल दूर ज्यादा नहीं।।       हर कीमत पे पाके रहेंगे,मंजिल हमने ये ठान लिया।       मुश्किल है पर असंभव नहीं,पाना मैंने ये मान लिया       दो पल और तु चल,हर कदम पे तेरी निशानी होगी।       अगर हार गया तू पहले तो,लानत तेरी जवानी होगी।       योध्दा वही जो चलता जाए,रुकने का हो माद्दा नहीं। जीने की तमन्ना जाग गयी,  रुकने का कोई इरादा नहीं। बस कुछ पल और चल राही,  अब मंजिल ...

आदत

मैं बुरा आदमी नहीं, मगर बुरी आदतों से मजबुर हुँ । तन्हाइयों में जीया हुँ,तभी तो' रोशनी से इतनी दूर हुँ।।       ज़रा समझना दोस्तों,मेरे दिल के जज्बातों को।       कैसे बदल सकता था, मैं उन हालातों को।       जिसकी कसक आज भी,दिल में मेरे बाकी हैं।       बुरा मयख़ाना होगा मगर,बुरा होता नहीं साकी हैं।       अंधेरे में जिया हुँ,तभी रोशनी से इतनी दूर हुँ। मैं बुरा आदमी नही,मगर बुरी आदतों से मजबुर हुँ। तन्हाइयों में जीया हुँ, तभी तो'रोशनी से इतनी दूर हुँ।।      वक्त सम्भलता नहीं,खुशी हाथों से फिसल जाती हैं।      ऐसे भी दिन दोस्तों, ये जिंदगी दिखलाती हैं।      क्या करेगा कोई आदमी,ऐसे परीवेश में।      बुरी आदतें मिलती है,तभी दोस्तों के भेष में।      कहती है थाम लो दामन,मैं तेरा अपना ज़रूर हुँ। मैं बुरा आदमी नही,मगर बुरी आदतों से मजबुर हुँ। तन्हाइयों में जीया हुँ,तभी तो'रोशनी से इतनी दूर हुँ।।      जब भी आदमी...

चेहरा

आँखों के सामने आज भी,तेरा चेहरा रहता हैं। मेरे दिल पे तेरी यादों का,हर पल पहरा रहता हैं।।      फिर से इस दिल में,कैसे नये सपने सजाए हम।      तुम्हें भूलकर किसी से,कैसे नजरें मिलाए हम।      ये सोचकर भी मेरा दिल,यहाँ घबड़ा जाता है;      कैसे दिल का दर्द सहें,अपने ज़ख्म छिपाए हम।      मोहब्बत में पड़ा जख़्म,बड़ा ही गहरा रहता हैं।। आँखों के सामने आज भी,तेरा चेहरा रहता हैं। मेरे दिल पे तेरी यादों का,हर पल पहरा रहता हैं।।      कैसे निकलें सनम हम,तेरी यादों के साए से।      अगर भूलना ही था,तो'क्यूँ दिल में आए थे।      आज तेरी हर बात,दिल के अरमाँ बन गए।      देख तेरी चाहत में हम,क्या से क्या बन गए।      प्यार अगर दिल से हो,तो'रंग बड़ा सुनहरा रहता हैं। आँखों के सामने आज भी,तेरा चेहरा रहता हैं। मेरे दिल पे तेरी यादों का,हरपल पहरा रहता हैं।।      मलाल रहता है,दिल को तेरी जरूरत होती हैं।      तेरी खातिर जो अश्क़...

दुश्मनी

कल तक राहों में जो,मेरे फुल बिछाते थे, आज मेरी ख़ातिर,उसने काँटो से दोस्ती कि हैं। बाँटें थे अरमाँ हमनें,जिनसे अपने दिल के, आज उन्होंने ही हमसे,दिल से दुश्मनी की हैं। क्या पता उनको,भला इस दिल कि आरजू, मेरे दिल ने किस कदर,उनसे दिल्लगी कि हैं। हाँ ये सच है सनम,तड़पे होगे तुम भी बहुत, मग़र मैंने घुट-घुट के,यहाँ सारी जिंदगी जी हैं। तुझे औरों कि जरूरत,यहाँ नहीं हैं मेरे ख़ातिर; मैंने तेरे ख़ातिर हर पल,सपनों कि बली दी हैं। मेरा दर्द तुझको सनम,भलें महसूस हो न हो; तेरे दर्द पे क़ुर्बा,मैंने अपनी सारी जिंदगी की हैं। क्या मचले थे अरमाँ तेरे,मुझसे भी मिलने को, मेरे अरमानों ने तो'तेरी यादों में,खुदकुशी की हैं। तु भले भूल जाए,गुजरें वक़्त के उन पैमारों को; मग़र मैं भूला दूँ कैसे,जिन लम्हों ने खुसी दी हैं। हँसता हुँ मैं यहाँ,अब अपने रम-जो-गम पे भी, तेरी वफ़ा ने ऐसी सनम,मेरी लबों पे हँसी दी हैं। हैं तेरा फैसला क्या,जो भी हो'मेरे मित तु बता; तेरी हसरतों के लिए,मैंने रब से बन्दगी की हैं।

ख़्याल

क्यूँ अपनी जिंदगी का,इतना ख़्याल करते हो। बात मरने कि करते हो,फिर भी सवाल करते हो।        जिंदा वो भी हैं, जो औरों के ख़्याल रखते हैं।        जो बोलते नही,वो भी दिल में सवाल रखते हैं।        ज़रा पूछो उनसे,उनके दिल मे भी अरमान हैं।        कौन यहाँ कैसे जिया,यही उसकी पहचान हैं।        बड़ी बेतकल्लुफ़ी से जीते हो,अमा कमाल करते हो। क्यूँ अपनी जिन्दगी का,इतना ख़्याल करते हो। बात मरने कि करते हो,फिर भी सवाल करते हो।।       भला जो पीछे हैं, कैसे यहाँ रास्ता बतायेंगे।       आगे चलने वाले,पीछे मुड़कर गीर जायेंगे।       इससे तो अच्छा,तुम बढ़कर हाथ थाम लो।       जब मिले न मंजील, तो ख़ुदा का नाम लो।        जिनसे है दुनीया,उनके भी नाम पर बवाल करते हैं। क्यूँ अपनी जिंदगी का,इतना ख़्याल करते हो। बात मरने कि करते हो,फिर भी सवाल करते हो।।        किसी पे मरनेवाले,जिंदगी की दुहाई देते नहीं।   ...

लड़की

मेरे दिल में सिर्फ तुम ही तुम थे,                                        मग़र खुली रह गयी,कोई खिड़की।                                    मेरी जिंदगी में'हालात में बंधकर,                                      आइ एक दिन,इक और लड़की।        मत पुछो तब क्या हुआ,जब दोनों दिल में साथ हुए।        मैं बड़ी उलझन में था,बड़े उलझें मेरे जज़्बात हुए।        यूँ कब कहाँ कैसे वो,सनम' मेरे दिल में समा गयी।        मैं तो था तुम पे ही मरता,पर वो मेरे दिल को भा गयी।        क्या करता मैं भी जब,आँखे थी मेरी उससे लड़ती। मेरे दिल में सिर्फ तुम ही तुम थे, मगर खुली रह गयी,कोई खिड़की। मेरी जिंदगी में'हालात में बंधकर, आई एक दिन,एक...

बेवफ़ा

बड़े नाजुक मोड़ पे तुम, हमें यूँ छोड़ निकले कहाँ किस ओर मेरा दिल, तुम तोड़ निकले        बता भी देते तो, संभाल लेते दिल को        अब कैसे सम्भालेंगे,इस मुश्किल को        ना सोचा मेरा क्यूँ,दगा दे गए तुम।        ये कैसी गलती की सजा दे गए तुम।        मैंने तुम्हें यहाँ,बहुत समझा विनम्र,        और दोस्त तुम,यक़ीनन बड़े मुहजोड़ निकले। बरे नाजुक मोड़ पे तुम, हमें यूँ छोड़ निकले कहाँ किस ओर मेरा दिल,तुम तोड़ निकले        बड़ा भरोसा था मुझको,तेरे साथ का        मगर अब क्या होगा, मेरे जज्बात का        क्यूँ खेला तुमने यार,भला मेरे दिल से        दिल मिलता है दोस्त, बड़ी मुश्किल से        वो समझ न सके,कभी मेरी दोस्ती को,                     जिनसे  मिलाई  कलाई, कलाई मरोड़ निकले।   बड़े नाजुक...

चिराग़

आग से आग,कभी बुझती नहीं।                    जले जो शम्मे से चिराग,वो चिराग़ यूँ बुझती नहीं। मिलता है दरिया समुन्द्र के राहो में।                दरिया कि राहो में,समुन्दर कभी रुकती नहीं।            लाख जमा कर लो बूंद, वो समुन्द्र नहीं बनता।       सिर्फ किताबो से ही,कोई सिकंदर नहीं बनता। जब तक हौसला जुनू बनके,सिने से गुजरती नहीं। जले जो शम्मे से चिराग,वो चिराग यूँ बुझती नहीं।        मिट्टी के पुतले है बहुत,मर्दों का दिल मिलता नहीं।        सिर्फ बहार आने से,गुलर का फुल खिलता नहीं। मिले जो मर्दे दिल,सारी दुनिया झुकती नही। जले जो शम्मे से चिराग,वो चिराग यूँ बुझती नहीं।        पथ्थरों से उनको शिकायत,जिनके कोमल पाँव है।        मंजिल मिली है उसे,जिसने जिंदगी लगा दी दाँव है। वो जिन्दगी भी क्या,ख्वाब जिन आँखों में पलती नहीं। जले जो शम्मे से चिराग, वो चिराग यूँ बुझती नही...

आसार

मैंने माना मेरा दिल बीमार है,बीमार ही रहेगा। पलट के देख लोगी तो'तेरा आभार भी रहेगा। मैंने माना मेरा दिल बीमार है,बीमार ही रहेगा। पलट के देख लोगी तो'तेरा आभार भी रहेगा।। यूँ बार-बार खुद को,तु भूलने की ज़िद न कर; तेरे साथ ही,मेरी मोहब्बत का आसार भी रहेगा। मेेरे साथ गुजरे लम्हों का,सनम हिसाब न कर। तेरी यादों से ही दिल,हमेशा गुलज़ार भी रहेगा। मुझे छोड़कर बेशक,यहाँ तु अपना घर बसा ले। मग़र नए रिश्तों के संग, पुराना प्यार भी रहेगा। ख़ुदा ने तेरे नसीब में,लिख दिया है अशोककुमार। तो मेरी बात भी सुनले,ये अक्षयकुमार भी रहेगा। तेरे पति और बच्चों की,अब मै फ़िक्र नही करता। तेरे जिश्म और रूह पर,मेरा अधिकार भी रहेगा। दे देना सारी उम्र भलें उनको,मैं फिर भी तेरा हुँ; मेरे लिए काफ़ी यहाँ,तेरा चंद इतवार भी रहेगा। ना मिलेगा सागर,तुमको अपने हजार रिश्तों में। मेरी कमी खलेगी,भलें रिश्तों का अंबार भी रहेगा। हर मोड़ पर मेरा दिल,यूँ सनम फिसलता नही है। मेरी नजर को सनम,ताउम्र तेरा इंतजार भी रहेगा।

मिशाल

बिखरता हैं तो वीरो का,मिशाल देता हैं। यूँ बातों से वो,हार अपनी टाल देता हैं। मिली हैं जीत तो,यहाँ ये गुरुर उनको हैं; अगर हो खून में गर्मी,तो उबाल देता हैं। हुनर वक्त का कहाँ, मोहताज रहता हैं; आदमी पथ्थर को,मूरत में ढाल देता हैं। दौड़ अपना हो,तो'सब आसान लगता है; वक़्त अच्छे-अच्छों को,पामाल देता हैं। हो जीवन में रंग,तभी हैं ये रश्में- रिवाज़े, बेज़ार मौसम में,न मज़ा गुलाल देता है। बनाओ दिल के रिस्ते,तभी जानोगे यहाँ; ईश्क़ कमाल हो,तो'दर्द कमाल देता है। वो यूँ दिखाता है मुझें,अपनी अहमियत; ख़ुद गिराता हैं,और हमें संभाल देता हैं।

हसरत

क्या करूँ अपनी तन्हाईयो का ज़िक्र, हर लम्हा बातों में गुजर जाएगा। तु उन्हें पाने कि हसरत रखता हैं, तु तो'चन्द मुलाकातों में,उजड़ जाएगा।।         हाँ ये सच है वो कयामत है सर से पॉव तक।         मग़र उसकी बेवफाई के'चर्चे हैं हर गाँव तक।         लोग अक्सर डुब जाते है,उसकी निगाहों में।         अभी कुछ पल तो चला हैं,मोहब्बत कि राहों में।        और कहता है पार,हर दरीया समुन्द्र को कर जाएगा। क्या करूँ अपनी तन्हाईयो का ज़िक्र, हर लम्हा बातों में गुजर जाएगा। तु उन्हें पाने कि हसरत रखता है, तु तो चंद मुलाकातों में उजड़ जाएगा।।        संभाल दिल को,ये अक्सर गलत फ़ैसले लेती हैं।        जज्बातों को छेड़ती है,अक्सर झूठे हौसलें देती हैं।        खुद ही टुटटी है,जख़्म औरो को दे जाती है।        जख़्म सहते है हम,और ये दिल मुस्कराती हैं।        मंजिल पाना तो दूर,सोच कैसे अपने घर को जाएगा। क्या करूँ...

हालात

बड़ा खुशनसीब था,जब तुम साथ थे। आज यही बदनसीबी हैं कि,तुम साथ हो। कल तलक तुमने मेरी,तन्हाइयाँ बाटी थी। आज तेरी ख़ातिर ही,तन्हा मेरे हालात थे।        मैं समझ न सका,वक्त कि नज़ाकत को।        तेरे चेहरे में छिपी,तेरी शराफत को।        तेरी अदा को,तेरी मुस्कुराहट को।        मैं दाद देता हुँ दोस्त,तेरी हिमाकत को।        जख़्म सारे दिल पे लगे थे,बड़े संगदिल तेरे जज़्बात थे। बड़ा ख़ुशनसीब था,जब तुम साथ थे। आज यही बदनसीबी हैं कि,तुम साथ हो। कल तलक तुमनें मेरी,तन्हाइयाँ बाटीं थी। आज तेरी ख़ातिर तन्हा,मेरे हालात हैं।।       क्या कहुँ जो तेरे, ये बदले-बदले अंदाज हैं।       न संग चला होता तो न होता,तु जो आज हैं।       आज मुझे ही सिखाता,जिंदगी के मायने हैं।       रिश्ते हैं सीढ़ियां,रिश्तेदार उनके मुहाने हैं।       आ गयी तुझे भी दुनियादारी,कातिल आज तेरे हर बात थे। बड़ा ख़ुशनसीब था,जब तुम साथ थे। आज यही बदनसीबी है कि,तुम ...

फ़ुरसत

लोग कहते है तुमसे न होगी मोहब्बत, मैंने कहा-प्यार कि हमें फुर्सत कहाँ है! अब दिल के बदले कोई,यहाँ जान लुटाए  लोगों में बची,अब इतनी हिम्मत कहाँ है! सर कटने तक यहाँ,कोई नज़र तो मिलाए किसी आँखों में एसी,अब जुरर्त कहाँ है! जब से इश्क यहाँ, एक व्यापार बन गया; दिलों में रहती किसी की,इज्जत कहाँ है! मोहब्बत गलियों में,इस कदर बदनाम है; इससे बड़ी दुनिया में,कोई तोहमत कहाँ है! जिनके ख्यालों में हमने,कई उम्र गुजारी है, आज मेरी यादो से,अब वही रुक्सत कहाँ है! मै भी सनम तेरे इश्क में'यहाँ जान दे देता, मगर पहले वाली अब वो,मोहब्बत कहाँ है! मैंने लोगो को कोई बार,खंगाल कर हैं देखा; सच्चे दिल कि लोगों को,अब जरुरत कहाँ है! मेरे शब्दों से मुझें,यहाँ शायर न समझियेगा, कवियों वाली मुझमें,रहती शराफ़त कहाँ हैं। मोहब्बत की निशानी भी'कागजी हो गयी है, इन कागजी फुलों में खुशबु,वो रंगत कहाँ है !

तन्हाई

जिंदगी गमों के सहारे, चलती रही। हर कदम पे मुझे, तन्हाइयाँ मिलती रही।।         जिंदगी के राह में, सहारा मिल न सका।         डुबे इस कदर मझधार में,किनारा मिल न सका।         अपनी हालत देखकर,हम बड़ी हैरानी में थे।         लहरों से खेलने वाले,आज खुद ही पानी में थे।         अरमान जो दिल में थे,दिल को ही छलती रही। जिंदगी गमों के सहारे,चलती रही। हर कदम पे मुझे,तन्हाइयाँ मिलती रही।।          तुफ़ाँ के साथ हम,साहिल का नजारा करते रहे।          खुदा भी मेरी मौत कि, तारीखें बदलतें रहे।          चाहकर भी हम,कयामत कर न सके।          जो मिला उसको भी,सलामत रख न सके।          ख़्वाब आँखों मे बस,जख़्म बन पलती रही। जिंदगी गमों के सहारे, चलती रही। हर कदम पे मुझे,तनहाइयाँ मिलती रही।।          उम्मीदों के बोझ तले,दब से गए।   ...

वसीयत

दी ऊँची शिक्षा,अपने बच्चो को, हर गम से मैं,निकाल आया था। बस बचा कर,चंद गुजरी यादें; मैं बीबी संग,नैनीताल आया था। गिर पड़ा मंदिर की सीढियों से, घर बुरी तरह निढाल आया था। हजार रिस्ते निभाया,मग़र कोई;  देखने न,मुझें कमाल आया था। जब गिन रहा था मैं आँखरी साँसे, सुना' देखने मेरा लाल आया था। चन्द साँसे थी,वो भी निकल गयी, वक़्त यूँ मुझपर,पामाल आया था। हाल बेटे ने,मेरा पूछा तक नहीं,कहा' मुझें वसीयत का ख्याल आया था।

हिसाब

जख़्म दर जख़्म दिए,कहती हो हीसाब कर डाला। ए सनम तुमने मोहब्बत में,हमें बेनक़ाब कर डाला।।      जैसे थे'जो भी थे,हम ख़ुद से न अंजान थे।      ए सनम तेरी महफ़िल में,कुछ मेरे भी कद्रदान थे।      तुमने हाथ बढ़ाया तो'तुमको ही जिंदगी समझा।      हमने जिसे मोहब्बत समझा,तुने दिल्लगी समझा।      अबतक जो बनाया,उन रिस्तों को खराब कर डाला। जख़्म दर जख़्म दिए,कहती हो हीसाब कर डाला। ए सनम तुमने मोहब्बत में,हमें बेनक़ाब कर डाला।।      टुकड़ो में जीया था मैं,बरसों से इस आस में।      अच्छा हुँ या बुरा हुँ,सच्चा दिल तो मेरे पास में।      जो दिल में उतड़कर देखेगा,मेरी कीमत समझेगा।      खा गया मैं धोखा,दिल के रिस्तों के विस्वास में।      हम क्या थे सनम,और तुमने'क्या ज़नाब कर डाला। जख़्म दर जख़्म दिए,कहती हो हीसाब कर डाला। ए सनम तुमने मोहब्बत में,हमें बेनक़ाब कर डाला।।      ए सनम मेरे दिल को'तोड़ना आसां न था।      मग़र मुमकिन तेरे ल...

कोशिश

कोशिशें किए हम बहुत, पर मुकाम तक न पहुँचे। सोचा था पियेंगे खूब मगर, आँखरी ज़ाम तक न पहुँचे।         हर घूँट के साथ,प्यास नई बढ़ती गयी।         पिया जो इक बार,कमबख्त साथ छोड़ती नहीं।         बिछड़े इस कदर राह से,छुट गयी सारी मंजिल।         अब समझ में आता है,काश संभाला होता दिल।         यूँ सोचते-सोचते हम,किसी काम तक न पहुँचे। कोशिशें किए हम बहुत, पर मुकाम तक न पहुँचे। सोचा था पियेंगे खूब मगर, आँखरी ज़ाम तक न पहुँचे।।         टुट गए दिल के अरमाँ,जो दिल में बाकी थे।         कल तक गलत थे जो,आज वही मेरे साथी थे।         पिते थे सभी पर,उनका कोई निशाँ न था।         पिते होंगे और भी,मेरे जैसा कोई पिया न था।         यूँ चाहकर भी हम,किसी अंजाम तक न पहुँचे। कोशिशें किए हम बहुत, पर मुकाम तक न पहुँचे। सोचा था पियेंगे खूब मगर, आँखरी ज़ाम तक न पहुँचे।।     ...

दिवाली

बड़ी मुश्किल से कट रहे हैं,ये कंगाली के दिन।  न जाने कैसे कटेंगे अबकी,अपने दिवाली के दिन।       क्या फिर पटाखे बन,मेरे अरमान ही फुटेंगे।       औरों के जलते दीप,घर की रौनकता लूटेंगे।।       बच्चे मिठाई का क्या,सिर्फ इंतजार ही करेंगे।       बीबी की बेरुखी से कैसे,हम दो-चार करेंगे अब अफ़सोस होता है,जब बिताते थे खाली के दिन।  न जाने कैसे कटेंगे अबकी,अपने दिवाली के दिन।।       न वक्त को समझा,न वक्त के साथ चले।       हर पल मेरे संग,ख्वाबो की बारात चले।।       मजा लेते थे जिंदगी का, खूब आराम करते थे।       अपनी जवानी की नूमाइश, सरेआम करते थे। हमने भी गुजारे है,तारीफ़ो में बजते ताली के दिन। न जाने कैसे कटेंगे अबकी,अपने दिवाली के दिन।       ख्वाइशें पूरी होती,बिन जुबाँ से आवाज निकले।       मगर जब अपनी गली से,दोस्त हम आज निकले।       वही नजर हमसे न जाने,कितने सवाल करती है।       सब किस्मत है,ये...

इंसाफ़

कल तक थे कठघरे में,आज इंसाफ करते हैं। नफ़रत भरी जुबान में, चाहत कि बात करते हैं।।        हैं सच क्या,झुठ क्या,यहाँ सब उनकी जुबानी हैं।        हैं शोहरत का नशा उनपे'दौलत कि भी रवानी हैं।        होता वही जो चाहते,किस्मत भी मेहरबान हैं।        उनकी हर अदा के आज, कई क़द्रदान हैं।        देखो किस कदर यहाँ पे' हालात बदलते हैं। जो कल तक थे कठघरे में,आज इंसाफ करते हैं। नफ़रत भरी जुबान में, चाहत कि बात करते हैं।।        जब थे कठघरे में,खुद क़िस्मत के मोहताज थे।        कभी सोचा भी नहीं था,जो होंगे वे आज थे।        ये राज उनका कबसे,हम सीने में दबाये हैं।        कैसे किस क़दर गीरकर,वो इतना उठ पाए हैं।        आज उनको ही मिलती हैं सियासत,        जो औरों के यहाँ जाकर,नाक रगड़ते हैं। जो कल तक थे कठघरे में,आज इंसाफ करते हैं। नफ़रत भरी जुबान में, चाहत कि बात करते हैं।   ...

तसवीर

हुस्न चाहत कि काश,कोई जागीर होती। काश उनकी मेरे पास,कोई तस्वीर होती।।       याद आती तो तस्वीर, सीने से लगा लेता।       उनका चेहरा देख,दिल कि प्यास बुझा लेता।       इस सुने दिल को,जीने का बहाना तो मिलता।       ढूंढता उनसे मिलता,कोई नजराना तो मिलता।       अपनी मोहब्बत कि ऐसी,तासीर न होती। हुस्न चाहत की काश,कोई जागीर होती। काश उनकी मेरे पास, कोई तस्वीर होती।।       याद आता है मुझको'उनका हँसना-सँवरना,       याद आती है मुझको'हर वो नादानी।       वो मादक अदाएं,जो दिल को निभाए;       वो फुलों से खिलती,उनकी जवानी।       जब भी कहता मैं,छोड़ जाओ कोई निशां;       कहती मेरी यादें ही हैं,मेरे प्यार कि निशानी।       काश इन हाथों में'उनकी भी,कोई लकीर होती। हुस्न चाहत कि काश,कोई जागीर होती। काश उनकी मेरे पास,कोई तस्वीर होती।।       रोज़ यादों को बुनता हुँ,दिल को भरमाता हुँ।     ...

इम्तेहान

इस कदर मोहब्बत में,मेरा इम्तेहान तुम न लो। यूँ कतरा-कतरा करके, मेरी जान तुम न लो।        मर जाएंगे ऐसे ही, हम तो हालात के मारे है।        जिन्दा भी हैं तो क्या हैं, हम अब भी तुम्हारे है।        वक्त बदल गया है लेकिन, हर बात नहीं है बदले।        तेरे खातिर मेरे दिल के, जज्बात नहीं है बदले।        तुम जो चाहे वो कह लो, मगर मुझे जान तुम लो। इस कदर मोहब्बत में, मेरा इम्तेहान तुम न लो। यूँ कतरा-कतरा करके, मेरी जान तुम न लो।।         आज भी धड़कने, तुझे पास बुलाती है।         हर लम्हों में तेरा, एहसास दिलाती है।         तुझे भूलने की कोशिश मै करू भी तो कैसे ;         तुझे एक पल भूलना, मुझे इतना सताती है।         नहीं हो सकती मेरी, दो पल अपना मान तुम लो। इस कदर मोहब्बत में, मेरा इम्तेहान तुम न लो। यूँ कतरा-कतरा करके, मेरी जान तुम न लो।।         द...

इल्ज़ाम

लोग मिलते हैं और हमको,ये ईल्ज़ाम देते हैं। क्यूँ ख़ुदा से पहले हम,सनम तेरा नाम लेते हैं।।       अक्सर लबों पे रहती,दिलवर कि रुबाई हैं।       तेरा नाम लेकर ही,मुझे जीने की अदा आई हैं।       समझेंगे वही जो मोहब्बत में,दिल से काम लेते हैं। लोग मिलते हैं और हमको,ये ईल्ज़ाम देते हैं। क्यूँ ख़ुदा से पहले हम,सनम तेरा नाम लेते हैं।।       अग़र ये जुल्म हैं तो'मैं ये ज़ुल्म बार-बार करूँगा।       जिसे देखा नहीं कैसे,तुझसे ज्यादा प्यार करूँगा। लोग मिलते हैं और हमको,ये ईल्जाम देते हैं। क्यूँ ख़ुदा से पहले हम,सनम तेरा नाम लेते हैं।       सुनना ज़रा ये ग़ौर से, दिल ज़रा ये थाम के।       रह गयी ख़ुदाई हैं कहाँ, बस ख़ुदा के नाम के।       ऐसी खुदाई से भला हम,आँखों से दिल का पैगाम लेते हैं। लोग मिलते हैं और हमको,ये ईल्ज़ाम देते हैं। क्यूँ ख़ुदा से पहले हम,सनम तेरा नाम लेते हैं।।       बड़ी मुश्किल से,ये बात समझ में आई हैं।       चाहत ही ख़ुदा हैं, मोहब्ब...

ख़्वाईश

हैं ख़्वाईश मेरी बस यही दोस्तों, मिले वो हर जगह,जिस गली से हम निकलें। ये जिंदगी यूँ ही'कट जाए तो क्या, मग़र उनकी चौखट पे,मेरा दम निकलें।।        हम महफ़िल हो या मयख़ाने में,        दिखे हर घड़ी वो,हर नजराने में।        वो चेहरा जो मेरी आँखों में हैं,        कहाँ कोई है,इस जमाने में।        वो ख़ुश्बू जो मेरी साँसों में हैं।        मेरी धड़कन में है,वो मेरी बातों में हैं।        था समझा जिसे,हमने अपना मुकद्दर'        उम्मीदों से उनके,हम ही कम निकलें। हैं ख़्वाईश मेरी बस यही दोस्तों, मिले वो हर जगह,जिस गली से हम निकलें। ये जिंदगी यूँ ही'कट जाए तो क्या, मगर उनकी चौखट पे,मेरा दम निकलें।।       तु खूबसूरत हैं, तुझे बहुत चाहनेवाले मिलेंगे।       मगर मेरे दिल में भी,तेरे अरमानों के फूल खिलेंगे।       हर दुआ में ख़ुदा से,ये दिल तुझे माँगेगा।       मैं चाहूंगा कुछ,और ...