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बदला

 सिर्फ़ फायदा चाहती हैं,नुकसान का सौदा नहीं लेती। महबूब छोड़िए,नई पीढ़ी"बाप का भी बदला नहीं लेती। माना साथ उनके,यहां हज़ार मजबूरियां रहीं होंगी; मग़र मुझे चाहती,तो"छोड़ जाने का फैसला नहीं लेती। मोहब्बत क्या है,जहां"घोसलें हो,उन शाखों से समझिए; उनपर चिड़ियां अंडा दें,तो"वो चिड़ियों से अंडा नहीं लेती।

शिकारी

 साथ कैसे चलता,तुम नहीं थे साथ निभानें वालें। तुम ठहरें शिकारी,हम थे"परिंदें को उड़ानें वालें। चुनाव आने दीजिए,वो सभी मसीहा हो जाएंगे; जो अब तलक रहें हैं,हमपर जुल्म ढ़ाने वालें।

रात

 बाजुएं खोलिए,आप कोई करामात कीजिए। आईए बैठिए,हमसे भी" कुछ बात कीजिए। मेरा महबूब चांद हैं,ग़र देखनी है आपको,तो" पर्दा गिराइए,महफ़िल में तनिक रात कीजिए।

लहज़ा

 बस इतनी बात पे उनका लहज़ा बदल गया। अब क्या बताए वो शख्स,कितना बदल गया। कल तलक जो मुझपर,जान छिड़कता था; आज मेरे कूचे से,उसका रस्ता बदल गया।

उन्वान

 दोस्तों की खातिर,अपनी सारी उन्वान देने वालें बच्चें। अब कहां मिलते हैं,मोहब्बत में जान देने वाले बच्चें। अब नहीं रही वो मासूमियत,न रहा वो अब सादगीपना; जब होते थे,कागज के परिंदों को भी"उड़ान देने वाले बच्चें। इतना तो समझिए,कोई उम्रभर इंतजार में रह सकता हैं; मोहब्बत में झूठी कसमें,झूठी जुबान देने वालें बच्चें। इक ही उम्र सौ लोगों से हज़ार रिश्ते बनाने वालें बच्चें; क्या समझेंगे,चाह में कैसे होते थे कुर्बान होने वालें बच्चें। परेशानियों से गुजारिए,जो घर के लाडले हैं,अज़ीज़ हैं; मुर्गियों सी परवरिश से न होंगे,बाज़ की उड़ान वाले बच्चें।

रिल बनाने वाली लड़की।

 शब्दों के धागे से जुड़कर,फ़िल बनाने वाली लड़की। याद बहुत आती हैं मुझको,वो रिल बनाने वाली लड़की। छोटे से दिल को कुनबा,तहसील बनाने वाली लड़की। याद बहुत आती हैं मुझको,वो रिल बनाने वाली लड़की। आटे के लोइयें से अक्सर,वो दिल बनाने वाली लड़की। याद बहुत आती हैं मुझको,वो रिल बनाने वाली लड़की। बालों को भींगाकर अपने,झील बनाने वाली लड़की। याद बहुत आती हैं मुझको,वो रिल बनाने वाली लड़की। अपने हुस्न से,सागर को"साहिल बनाने वाली लड़की। याद बहुत आती हैं मुझको,वो रिल बनाने वाली लड़की।

जुर्रत

 कुछ भी होता,ऐसी भी जुर्रत नहीं करता। मैं तुम्हें जानता,तो"तुमसे मोहब्बत नहीं करता। मेरा गुरूर,तो"अब तेरी यहां कदमों में हैं। खुद की इतनी भी,तो"फ़जीहत नहीं करता। तू मोल न कर,तू जो चाहे"उसी मोल मुझे ले लें; दाम घटाता भी,तो"कम इतनी कीमत नहीं करता। माना तुम परेशा हो,तुमपर"जिम्मेदारियां भी हैं; तो"ऐसे हालात में क्या,कोई मोहब्बत नहीं करता।

बात

 बात गलत हो,तो"माफ़ी दें,हम पांव लगें । नज़दीकी इतनी न कीजिए,जिससे घाव लगें। अगर जाननी हैं आपको,हम क्या चाहते हैं; तो"शहर ऐसा बसाइये,साहेब"जो गांव लगें। भरोसा उठ जाए,तो दिल को"ऐसा लगें हैं। के कोई जान भी दें,तो दोस्त"सिर्फ़ दांव लगें।

व्यापार

 किसी भी दर्द के,व्यापार में नहीं आना हैं। मुझे किसी तरह,बाजार में नहीं आना हैं। कोई चाहें ऐसे की,फिर"कोई शिकायत न रहें; वर्ना मुझें किसी के,प्यार में नहीं आना हैं। सिर्फ तुम भी सनम,मेरा इलाज़ हो सकते थे; तेरे बग़ैर,शोहरतें-इश्तेहार में,नहीं आना हैं। उनका कुत्ता भी बीमार पड़े,तो"खबर बनती हैं; हम मर भी जाए,तो"अख़बार में नहीं आना हैं।

चाहता हूँ।

 ख़ुद को हार जाए, ग़र मैं जीतना चाहता हुँ।  यहाँ किसी का होना,दोस्त"मैं इतना चाहता हुँ।  फ़िर वही सवाल,उसी जि़द पर आ गए तुम; किस तरह बताऊँ,मैं तुम्हें कितना चाहता हुँ।  कुछ फ़रेब दिल मे भी होंगे,तुम्हें कैसे रखते; रखना तुम्हें दिल मे नहीं,बनाना ख़ुदा चाहता हुँ। तुम हँसती हुई,सनम"बहुत सुंदर दिखती हो; बस हंसती रहना,भला"और मैं क्या चाहता हुँ।  सबके हिस्से में नहीं आते,जन्नत के मंज़र; परियों की शोहबत मिलें,मैं ये कहाँ चाहता हुँ।

नाराज़

 तुझसे नाराज़ होकर, बता"मैं कहां जाऊंगा। तेरी दहलीज से भी क्या; मैं रोता हुआ जाऊंगा। बड़े एहसान फ़रामोश हैं; यहां के लोग,भूल जाएंगे; तुम ग़र साथ निभाओगी; तो"मैं आसमां हो जाऊंगा।

बेमिशाल

 बेइंतहा आया होगा,,बेमिसाल आया होगा। हिचकियां आई है,उसे मेरा ख़्याल आया होगा। और जानवर से भी,मोहब्बत हो जाती हैं; उसे भी,तो"बिछड़ने का मलाल आया होगा। कल बीमार बुढ़िया को,मुस्कुराते देखा था; यक़ीनन घर उसके,उसका लाल आया होगा। माना तू खूबसूरत हैं, मग़र"पर्दे में रहा कर; हुस्न पर्दे में हो,तभी"चांद पे सवाल आया होगा।

ज़ख्म

 ज़ख्म हमारे हैं, हमें सहने दीजिए। आपसे न होगा,आप रहने दीजिए। दुश्मन जो हैं मेरे,मुझें बुरा कहेंगे ही; गर बुरा कहते हैं,तो" कहने दीजिए। हमको यूं न टोकिए,ना हीं हमें रोकिए; हम तो"सागर हैं,हमें बस बहनें दीजिए। मेरा ये ख्याल हैं,हम जो भी हैं कमाल हैं; जो बेनूर हैं,आप उनको गहने दीजिए।

खुशनसीब

 वो जिनके भी,यहां रक़ीब होंगे। यक़ीनन वो लोग, खुशनसीब होंगे। चांद,सूरज उनके,कदमों में होगा; सनम जो भी तेरे,दिल के क़रीब होंगे। कुछ और हासिल की जरूरत नहीं; तेरे होने से,अमीर होंगे या गरीब होंगे। जो तेरे होकर,तेरी रहमत से चूक गए; वो भी लोग यहां,बड़े अज़ीब होंगे।

बात

 अब जो होना था,हो गया,तुम निज़ात बता देतें। इश्क़ से पहलें भला कैसे,हम जात बता देते। और उस दौड़ में उसने,संभाला हैं मुझको; जिस दौड़ में तुम छोड़ देते,ग़र हालात बता देतें। मेरे मिजाज़ से उनका यूं,मिजाज़ मिलता था। हिचकियां आ जाए,तो"उनके जज़्बात बता देतें। दिल मेरा बेतरतीब,सनम"अब ढूंढता रहता हैं; तुझसा मिलता,तो"दिल की हर बात बता देतें।

नज़र

 भले आप लाख उड़े,लोगों की नज़र में नहीं हैं। तक़ल्लुस ठीक कीजिए,आप बहर में नहीं हैं। ये जो बेताब हैं,के घर का चिराग़ जल उठें; जो चिराग़ जल गए,आज अपने घर में नहीं हैं। और फ़िर गाँव चलिए,यही आख़िरी रास्ता हैं; माना रौनकें बहुत हैं,मगर सुकून शहर में नहीं हैं। दोस्त नाराज़ है,के उनके महबूब की ख़बर हैं हमें; भला वो महबूब ही क्या,जो यहां ख़बर में नहीं हैं। इक तू ही परेशा नहीं यहां,भला कौन आराम में हैं; सफ़र में गर मैं हु,तो"यहां कौन सफ़र में नहीं हैं।

तमाशा

 इश्क़ में हमसें,अब और तमाशा नहीं होगा। सिर्फ कहने भर से,दिल को दिलासा नहीं होगा। मैं ख़ुदा नहीं की,हर शय पे जोर"मेरा चलें; मग़र हक़ीक़त हैं,फिर कोई तुझसा नहीं होगा। यक़ीनन आईना ही,तेरी सूरत देखता होगा। खुदा बनाए भी,तो फिर"तेरे जैसा नहीं होगा। माना तेरे बग़ैर जीना,बहुत मुश्किल होगा; मग़र इश्क़ में सागर,अब दरिया नहीं होगा।