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दाग

 अगर हो चांद कोई,तो"तनिक दाग़ चलतें हैं। तुम्हारा इरादा हो,तो"चलो न"भाग चलते हैं। और ये तो अपनी ही धुन में,मदमस्त चलता हैं; जमानेंं के रफ्तार में कहां,अनुराग चलते हैं। दिल के हिसाब में,दोस्त"सिर्फ जोड़ होता हैं; ये तो दुनियां के हिसाब में,गुना_भाग चलते हैं। अब कहां किसी को,तलाशा हुआ मिलता हैं; अगर मिल जाए,तो"समझो तेरे सौभाग्य चलतें हैं। जो सोना हैं,जिसे बेशक उम्रभर तपाया गया हो; उसपर तपिश ना कोई,ना ही आग चलतें हैं। मोहब्बत में जमाने भर का तजुर्बा क्या होगा; यहां तो चंद शायरी,आंखें,मीठे अल्फाज़ चलतें हैं।

मुकद्दर

 इतना हौसला तो, यहां समंदर में नहीं होगा। मैं तुझको चाहूंगा,भले तू मुकद्दर में नहीं होगा। वो नींद क्या,बिस्तर क्या,भला रात क्या होगी,; जब ठंड भी हो,और साथ तू चद्दर में नहीं होगा।

तारीफ़

 तड़पता हैं मगर"तनिक भी उफ़ नहीं करता। मुझे शिकायत हैं,तू मेरी तारीफ नहीं करता। कोई संशय,कोई सवाल,जेहन में नहीं रखना; मैं जिनसे मोहब्बत करता हूं,ज़िद नहीं करता। अगर कुछ बात हैं तुझमें,तो"गुमान रखा कर; वर्ना मैं इस उम्र में मोहब्बत,हरगिज़ नहीं करना।

शूल

 जीवन में जितने भी शूल मिलें। हमने ये समझा,सारे फूल मिलें। तुम तो बहारों की मल्लिका हो; हम ही थे,किच सने,धूल मिलें। मैने देखा हैं तंगी में,बदहाली में; जो भी लोग थे,यहां उसूल मिलें। यूं तो उन्हें,हमसे खूब मोहब्बत थी; मगर हमेशा खफा मिलें,मशगूल मिलें। जो थे हर लहज़े में,प्यार जताने वालें; अक्सर उन्ही से दगा मिलें,शूल मिलें।

बाग

 वो फूलों से नहीं रिझनेंवाले,जिनके कभी बाग रहें हैं। तुमसे मिलना इस दुनियाँ में,पर मेरे सौभाग्य रहें हैं। जर्रा_जर्रा आजमाया गया हैं,बातों से तो"कभी हाथों से; जो पत्थर थे तराशे गए हैं,और चांद में भी दाग रहें हैं। शब्दों की तासीर रहीं हैं,वक्त के हिसाब से बदलती हैं; पर जब तक तेरे साथ रहें हैं,ख्वाबों के सब्जबाग रहें हैं। और तुम उनसे मेरी खबर लेना,जहां बचपन मेरा बीता हो; दुनियां में उतनी आग नहीं,मेरे सीने में जितनी आग रहें हैं।

इख्तियार

 अब तो"धोखे पर भी,इख्तियार कर लेता हूं। तेरे बाद मैं,पत्थर से भी प्यार कर लेता हूं। इतना तो सिखाया हैं, मुझें तेरी मोहब्बत ने; रोज उजरता हुं,और नजरें चार कर लेता हूं। मलाल किसी बात का, मुझें अब रहता नही; दिल से खेलता हूं,दिल का व्यापार कर लेता हूं। जमानें के हिसाब से, ढल गया हुं शायद; अब रिश्तों में,मैं पीठ पर भी वार कर लेता हूं। और गिरकर उठने का,जबसे हैं भरोसा आया; लोगों को गिराकर मैं, मज़ा यार कर लेता हूं।

दिल की आग

 दिल की आग को,भला पैरों से बुझाता हैं कोई। अब तेरे बाद दिल में,न आता जाता हैं कोई। गिरकर मीनार से,फिर खबर कौन मीनार की लें; सहारा देकर कहां किसी को,अब उठाता हैं कोई। अभी उम्र बाकी हैं,माना"तुझमें बहुत रौनक हैं; पर"ये किसकी विरासत हैं,जो इतराता हैं कोई। बेखबर होकर भी"तुम, मुझें इतने अच्छें लगते हो; जैसें चांद देखने को छत पे,रात बिताता हैं कोई। ख्वाईश औकाद से बाहर हो,तो"निकल जायेंगे; मगर"अपनें दीवाने को,बुरा तो"न बताता हैं कोई।

तिल

 उसकी पांव पर तो"नज़र,सलिकें से टिकती ही नहीं; नज़ीर होगा जो उम्रभर,उसे देखनें के काबिल होगा। दुनियां की सारी खूबसूरती,तुम करीनें से समेटों;तो" वो भी मेरे महबूब के,गाल का इक छोटा तिल होगा। दावा हैं,चांद देखने को"उसे ही गगन में आता होगा; यकीनन"गुरुर सितारों का भी टूटा,बमुश्किल होगा। उसे और कुछ पाने की भला,अब जरूरत क्या हैं: तू जिसकी बाहों में होगा,जिसका मुस्तकबिल होगा। कोई सागर होगा भी तो तेरी आंखों में,डूबना चाहेगा; वादियों का भी" तुझे देखकर,बहकता दिल होगा।

उफनती नहीं हैं।

 बस इसी बात पे,मेरी उनसे ठनती नहीं हैं। रईशी गंभीर होती हैं,हर बात पे"उफनती नहीं हैं। तुम्हें क्या बयां करेंगे,यहां तेरे भला चाहनेवालें; दिल को पिघलाना परता हैं,शायरी यूं बनती नहीं हैं। मैनें तेरे बाद फिर कोई,उमरता सावन नहीं देखा; होली में घर आतें नहीं,दीवाली घर मेरे मनती नहीं हैं। उसे देखकर,सब्र करना भी"यहां बेवकूफी होगी;, और अफ़सोस हैं,के बेसब्री मेरी वो जानती नहीं हैं।

जी नहीं लगता

 महफ़िल हो या मयखानें में,कहीं नहीं लगता। बगैर तेरे सनम मेरा,अब ये जी नहीं लगता। उकेरा हैं जिसे मैंने अपनी,मोहब्बत के कलाम में; बदला हैं इस कदर की,तू अब वही नहीं लगता। उसे बयां की क्या जरूरत हैं,तू जिसके साथ हैं; अगर पास हीरा हो,तो"कौन जौहरी नहीं लगता। और मेरी फिक्र में तुमसें,परेशां भी नहीं हुआ जाता; मोहब्बत क्या ये रिश्ता तो"दोस्ती भी नहीं लगता।