अभिमन्यु
ये सच परिष्ठति विकट हैं, दुर्योधन सुधारा नहीं जाएगा। हर बार युद्धभूमि में घेरकर,अभिमन्यु मारा नहीं जाएगा। उठों अर्जुन गांडीव उठाओ,आज का सूरज छिपने वाला हैं। तेरा मासूम वीर अभिमन्यु,पुरखों के छल से मिटने वाला हैं। दोनों वार तुम्हें ही हैं सहने,औरों से वारा नहीं जाएगा। हर बार युद्धभूमि में घेरकर,अभिमन्यु मारा नहीं जाएगा। हैं इतिहास गवाह मानवता से,न मानवता रक्षित हुआ हैं। अपने कुल का नाश किया हैं,जब कुलवंसक भक्षित हुआ हैं। सिद्धान्तों के वेदी से,अब हर झूठ नकारा नहीं जाएगा। हर बार युद्धभूमि में घेरकर,अभिमन्यु मारा नहीं जाएगा। हैं छल का दौर चल रहा यहाँ,तुझें भी छल करना पड़ेगा। अनुग्रही कर्ण से लरनें को,और भी' बाहुबल करना पड़ेगा। हो अग़र कृष्ण नहीं तो,फिर'दुर्योधन सँहारा नहीं जाएगा। हर बार युद्धभूमि में घेरकर,अभिमन्यु मारा नहीं जाएगा।