सूरज
वक़्त की पाबंदियों में,ढ़लना जानता हैं। जो सूरज है,हर हाल में निकलना जानता हैं। ज़रा सब्र रखिये,अंधेरे के संग भी रहिये; वही बर्दास्त करता है,जो बदलना जानता हैं। ज़हर के साथ जीने की,अदा भी चाहिए यहाँ; अमृत को तो हर कोई,निगलना जानता हैं। हौसला हार जायेंगे,तो'हर राह हैं मुश्किल; वही ठेस खाता हैं,पैरों पे चलना जानता हैं। मेरी रौशनी से'जो जल न सका,ख़ाक जलेगा; वो जुगनू हैं,सिर्फ' चाँद को छलना जानता हैं। सिर्फ़ बहार आने से,खुशबूदार होती नहीं फिज़ा; महकता हैं वही, काँटो संग,खिलना जानता हैं।