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सूरज

वक़्त की पाबंदियों में,ढ़लना जानता हैं। जो सूरज है,हर हाल में निकलना जानता हैं। ज़रा सब्र रखिये,अंधेरे के संग भी रहिये; वही बर्दास्त करता है,जो बदलना जानता हैं। ज़हर के साथ जीने की,अदा भी चाहिए यहाँ; अमृत को तो हर कोई,निगलना जानता हैं। हौसला हार जायेंगे,तो'हर राह हैं मुश्किल; वही ठेस खाता हैं,पैरों पे चलना जानता हैं। मेरी रौशनी से'जो जल न सका,ख़ाक जलेगा; वो जुगनू हैं,सिर्फ' चाँद को छलना जानता हैं। सिर्फ़ बहार आने से,खुशबूदार होती नहीं फिज़ा; महकता हैं वही, काँटो संग,खिलना जानता हैं।

तकदीर

न तसब्बुर से होती हैं,न तकरीर से होती हैं। मोहब्बत जब भी होती हैं,तकदीर से होती हैं। ईश्क़ को न आँकीये यहाँ,मुनाफ़े के नज़रिए से; जब होने को अग़र हो,तो' ये तश्वीर से होती हैं। बेवफ़ा तु था,तभी तुझको भी बेवफा ही मिला; जो मजनूँ होता हैं,उसे ही मोहब्बत हीर से होती हैं।