सूरज
वक़्त की पाबंदियों में,ढ़लना जानता हैं।
जो सूरज है,हर हाल में निकलना जानता हैं।
ज़रा सब्र रखिये,अंधेरे के संग भी रहिये;
वही बर्दास्त करता है,जो बदलना जानता हैं।
ज़हर के साथ जीने की,अदा भी चाहिए यहाँ;
अमृत को तो हर कोई,निगलना जानता हैं।
हौसला हार जायेंगे,तो'हर राह हैं मुश्किल;
वही ठेस खाता हैं,पैरों पे चलना जानता हैं।
मेरी रौशनी से'जो जल न सका,ख़ाक जलेगा;
वो जुगनू हैं,सिर्फ' चाँद को छलना जानता हैं।
सिर्फ़ बहार आने से,खुशबूदार होती नहीं फिज़ा;
महकता हैं वही, काँटो संग,खिलना जानता हैं।
जो सूरज है,हर हाल में निकलना जानता हैं।
ज़रा सब्र रखिये,अंधेरे के संग भी रहिये;
वही बर्दास्त करता है,जो बदलना जानता हैं।
ज़हर के साथ जीने की,अदा भी चाहिए यहाँ;
अमृत को तो हर कोई,निगलना जानता हैं।
हौसला हार जायेंगे,तो'हर राह हैं मुश्किल;
वही ठेस खाता हैं,पैरों पे चलना जानता हैं।
मेरी रौशनी से'जो जल न सका,ख़ाक जलेगा;
वो जुगनू हैं,सिर्फ' चाँद को छलना जानता हैं।
सिर्फ़ बहार आने से,खुशबूदार होती नहीं फिज़ा;
महकता हैं वही, काँटो संग,खिलना जानता हैं।
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