कश्मीर
जब कायरता के दामन में, बीरता हुँकार भरेगी।
जब लाहौर की गलियों से,गंगा की धार बहेगी।
जब जिन्ना के वंसज सारे,माथे तिलक लगाएंगे।
भारत माँ के चरणों में,जब अपना शीश झुकायेंगे।
तब तू मांगना तुझको,ये सीना चीर दे दूँगा मैं।
पंजाब,हिमाचल संग तुझको कश्मीर दे दूंगा मैं।।
जब अबला न कोई नारी,न पेट किसी की खाली हो।
जब औरों के तोपों से ना, तेरे घर की रखवाली हो।
चैन-सुकूँ से जब बच्चें,देश में तेरे यहाँ सोने लगें।
तेरी माँ की कोखों से भी,भगत-आजाद होने लगें।
तब करना लड़ने की बातें,वर्ना चित फिर दे दूँगा मैं।
तब करना लड़ने की बातें,वर्ना चित फिर दे दूँगा मैं।
पंजाब,हिमाचल संग तुझको कश्मीर दे दूंगा मैं।।
जब बोल-बम के नारों से,तेरा भी सरोकार रहे।
जब केशरियाँ रंग में रंगने को,कराँची तैयार रहे।
जब हिमालय तेरी आँगन में,आकर पावँ पसारे।
तेरी संसद से भी गूंजे,जब जय श्री राम के नारे।
तब तु आना तेरी हाथों में,काट ये सिर दे दूँगा मैं।
पंजाब,हिमाचल संग तुझको कश्मीर दे दूँगा मैं।।
जब मां की लोरी में भी,पौरुषता का बखान रहे।
जब घर की मां से ज्यादा,मातृभूमि के ध्यान रहे।
जब सरहद पर मिटने को,देश का हर जवान रहे।
सौ करोड़ के दिल में जहाँ,अपना हिंदुस्तान रहे।
ऐसा हैं मेरा भारत,कैसे तुझें अपनी तकदीर दे दूँगा मैं।
पंजाब,हिमाचल संग तुझको कैसे कश्मीर दे दूँगा मैं।।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें