दिवाना बना डालूँगा।
आँखों में झाँक कर देखो,तुझें दिवाना बना डालूँगा।
अगर तुम न मिली तो,ये आशियाना जला डालूँगा।।
रंग लाएगी मौसम,अबकी बहार में।
इस कदर डूब गए है,तुम्हारे प्यार में।
अब चैने-सुकूँ सब है,तेरे इख्तियार में।
तेरी ख़ातिर,ये महफ़िल,ये जमाना जला डालूँगा।
आँखों में झाँक कर देखो,तुझें दिवाना बना डालूँगा।
अगर तुम न मिली तो,ये आशियाना जला डालूँगा।।
नजरों से दूर हो जाओ,इतना ही ज़ुल्म काफी है।
यूँ राह में मिले,यहाँ हम-तुम इक मुसाफिर हैं।
राह मिल गए तो,बस दिल का मिलना बाकी है।
इस मोड़ पे छोड़ जाओ तो,ये फ़साना जला डालूँगा।
आँखों में झाँक कर देखो,तुझें दिवाना बना डालूँगा।
अगर तुम न मिली तो,ये आशियाना जला डालूँगा।।
ये जिंदगी भी नही हैं,सनम तुमसे बढ़कर।
सबकुछ खो दिया हैं, मैंने तुझपे मरकर।
बस इतनी दुआ हैं, तु भी मुझसे प्यार कर।
नही तो तेरे खातिर,सनम'मैं खुद को मिटा डालूँगा।
आँखों में झाँक कर देखो,तुझें दिवाना बना डालूँगा।
अगर तुम न मिली तो,ये आशियाना जला डालूँगा।।
ख्वाबों को हक़ीकत में,बदलने कि बारी हैं।
हुस्न और इश्क़ के,मिलने कि अब बारी हैं।
हाल जो भी हो,तु जमीं पे सिर्फ हमारी हैं।
देखें कोई तुम्हे गौर से,उसकी आंखें निकलवा डालूँगा।
आँखों में झाँक कर देखो,तुझें दिवाना बना डालूँगा।
अगर तुम न मिली तो,ये आशियाना जला डालूँगा।।
मैं वहसी भी हुँ,सनम मैं दरिंदा भी हुँ।
अपने ज़िद पे सनम,मैं शर्मिंदा भी हुँ।
मगर तेरी ख़ातिर,जमीं पे जिंदा मैं हुँ।
तु कहे तो'अपनी हाथों से,अपनी अर्थी सजा डालूँगा।
आँखों में झाँक कर देखो,तुझें दिवाना बना डालूँगा।
अगर तुम न मिली तो,ये आशियाना जला डालूंगा।।
तु मेरा बचपना हैं, मेरी ज़िद कि ज़रूरत हैं।
दोष तुम्हारा भी हैं,जो तु इतनी खूबसूरत हैं।
क़यामत हैं मुस्कराना,बला कि ये तेरी सुरत हैं।
ताज का ग़ुरूर टूटेगा,लाख नजराना बना डालूँगा।
आँखों में झाँक कर देखो,तुझें दिवाना बना डालूँगा।
अगर तुम न मिली तो,ये आशियाना जला डालूँगा।।
आँखों में झाँक कर देखो,तुझें दिवाना बना डालूँगा।
अगर तुम न मिली तो,ये आशियाना जला डालूँगा।।
मैं वहसी भी हुँ,सनम मैं दरिंदा भी हुँ।
अपने ज़िद पे सनम,मैं शर्मिंदा भी हुँ।
मगर तेरी ख़ातिर,जमीं पे जिंदा मैं हुँ।
तु कहे तो'अपनी हाथों से,अपनी अर्थी सजा डालूँगा।
आँखों में झाँक कर देखो,तुझें दिवाना बना डालूँगा।
अगर तुम न मिली तो,ये आशियाना जला डालूंगा।।
तु मेरा बचपना हैं, मेरी ज़िद कि ज़रूरत हैं।
दोष तुम्हारा भी हैं,जो तु इतनी खूबसूरत हैं।
क़यामत हैं मुस्कराना,बला कि ये तेरी सुरत हैं।
ताज का ग़ुरूर टूटेगा,लाख नजराना बना डालूँगा।
आँखों में झाँक कर देखो,तुझें दिवाना बना डालूँगा।
अगर तुम न मिली तो,ये आशियाना जला डालूँगा।।
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