मिशाल
बिखरता हैं तो वीरो का,मिशाल देता हैं।
यूँ बातों से वो,हार अपनी टाल देता हैं।
मिली हैं जीत तो,यहाँ ये गुरुर उनको हैं;
अगर हो खून में गर्मी,तो उबाल देता हैं।
हुनर वक्त का कहाँ, मोहताज रहता हैं;
आदमी पथ्थर को,मूरत में ढाल देता हैं।
दौड़ अपना हो,तो'सब आसान लगता है;
वक़्त अच्छे-अच्छों को,पामाल देता हैं।
हो जीवन में रंग,तभी हैं ये रश्में- रिवाज़े,
बेज़ार मौसम में,न मज़ा गुलाल देता है।
बनाओ दिल के रिस्ते,तभी जानोगे यहाँ;
ईश्क़ कमाल हो,तो'दर्द कमाल देता है।
वो यूँ दिखाता है मुझें,अपनी अहमियत;
ख़ुद गिराता हैं,और हमें संभाल देता हैं।
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