लड़की

मेरे दिल में सिर्फ तुम ही तुम थे,                                        मग़र खुली रह गयी,कोई खिड़की।                                    मेरी जिंदगी में'हालात में बंधकर,                                      आइ एक दिन,इक और लड़की।

       मत पुछो तब क्या हुआ,जब दोनों दिल में साथ हुए।
       मैं बड़ी उलझन में था,बड़े उलझें मेरे जज़्बात हुए।
       यूँ कब कहाँ कैसे वो,सनम' मेरे दिल में समा गयी।
       मैं तो था तुम पे ही मरता,पर वो मेरे दिल को भा गयी।
       क्या करता मैं भी जब,आँखे थी मेरी उससे लड़ती।
मेरे दिल में सिर्फ तुम ही तुम थे,
मगर खुली रह गयी,कोई खिड़की।
मेरी जिंदगी में'हालात में बंधकर,
आई एक दिन,एक और लड़की।।
      करता क्या मैं भी सनम,हालात ही कुछ ऐसे थे।
      उसपे प्यार आना ही था,उसमें बात ही कुछ ऐसे थे।
      मगर देखा तुझे जब सनम,हम ज़रा घबड़ा गए।
      अपनी गलती छिपाने की ख़ातिर,देख तुम्हें मुस्करा गए।
      मग़र वो तो'हो ही गया था,जिससे तु थी अबतक डरती।
मेरे दिल में सिर्फ तुम ही तुम थे,
मगर खुली रह गयी,कोई खिड़की।
मेरी जिंदगी में, हालात में बंधकर;
आई एक दिन,इक और लड़की।।
       कैसे किस कदर,हम यहाँ मोम से पिघलते गए।
       घड़ी-घड़ी कदम-कदम,प्यार में फिसलते गए।
       कैसे तुम्हें बता पाता,चाहता था मैं भी तुमको।
       वो मुझे कहती रही,दिल में जगह दे दो हमको।
       दे दी जगह दिल में,प्यार तो मुझसे वो भी थी करती।
मेरे दिल में सिर्फ तुम ही तुम थे,
मगर  खुली रह गयी,कोई खिड़की।
मेरी जिंदगी में, हालात में बंधकर,
आई एक दिन,इक और लड़की।।
       हाँ तुने भी मुझपे था,खुद से ज्यादा एतबार किया।
       मगर मैंने भी सनम,तुमको था बहुत प्यार किया।
       कसूर मेरा न था,हम मोहब्बत में बहुत नादान थे।
       हमने थी तन्हाई बाटीं,पता चला वो मेरे अरमान थे।
       वो आग दबाता भी कैसे,जो आग सीने में थी भड़की।
मेरे दिल में सिर्फ तुम ही तुम थे,
मगर खुली रह गयी,कोई खिड़की।
मेरी जिंदगी में, हालात में बंधकर;                                      आई एक दिन,इक और लड़की।।




       

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