हसरत


क्या करूँ अपनी तन्हाईयो का ज़िक्र,
हर लम्हा बातों में गुजर जाएगा।
तु उन्हें पाने कि हसरत रखता हैं,
तु तो'चन्द मुलाकातों में,उजड़ जाएगा।।
        हाँ ये सच है वो कयामत है सर से पॉव तक।
        मग़र उसकी बेवफाई के'चर्चे हैं हर गाँव तक।
        लोग अक्सर डुब जाते है,उसकी निगाहों में।
        अभी कुछ पल तो चला हैं,मोहब्बत कि राहों में।
       और कहता है पार,हर दरीया समुन्द्र को कर जाएगा।
क्या करूँ अपनी तन्हाईयो का ज़िक्र,
हर लम्हा बातों में गुजर जाएगा।
तु उन्हें पाने कि हसरत रखता है,
तु तो चंद मुलाकातों में उजड़ जाएगा।।
       संभाल दिल को,ये अक्सर गलत फ़ैसले लेती हैं।
       जज्बातों को छेड़ती है,अक्सर झूठे हौसलें देती हैं।
       खुद ही टुटटी है,जख़्म औरो को दे जाती है।
       जख़्म सहते है हम,और ये दिल मुस्कराती हैं।
       मंजिल पाना तो दूर,सोच कैसे अपने घर को जाएगा।
क्या करूँ अपनी तन्हाईयो का ज़िक्र,
हर लम्हा बातों में गुजर जाएगा।
तु उन्हें पाने कि हसरत रखता हैं,
तु तो चंद मुलाकातों में उजड़ जाएगा।।
        धोखा देती है अक्सर,वो हुस्न के हथियार से,
        कितने लुट गए उसकी,बातों में प्यार से।
        बड़े-बड़े उससे,दिल कि बाजी में हारे हैं,
        तु तो अभी बच्चा है,मत सोच हम भी कुँवारे हैं।
        तेरी नैया डुबी तो पार,कैसे इस भँवर को पाएगा।
क्या करूँ अपनी तन्हाईयो का ज़िक्र,
हर लम्हा बातों में गुजर जाएगा।
तु उन्हें पाने कि हसरत रखता हैं,
तु तो चंद मुलाकातों में उजड़ जाएगा।।
        न कहता मैं औरो कि, ये एहसास हमारा हैं।
        हुस्न खुदा ने बक्शा है,खुबसूरत हर नजारा हैं।
        मगर वो अदा भी क्या,जो अदा क़ातिल निकले।
        बेवफाई में खुदा कोई,उसके भी काबिल निकले।
        तभी समझेगी चोट खाकर,कोई दिवाना किधर जाएगा।
क्या करूँ अपनी तन्हाईयो का ज़िक्र,
हर लम्हा बातों में गुजर जाएगा।
तु उन्हें पाने कि हसरत रखता हैं,
तु तो चंद मुलाकातों में गुजर जाएगा।।

 


      

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