इल्ज़ाम
लोग मिलते हैं और हमको,ये ईल्ज़ाम देते हैं।
क्यूँ ख़ुदा से पहले हम,सनम तेरा नाम लेते हैं।।
अक्सर लबों पे रहती,दिलवर कि रुबाई हैं।
तेरा नाम लेकर ही,मुझे जीने की अदा आई हैं।
समझेंगे वही जो मोहब्बत में,दिल से काम लेते हैं।
लोग मिलते हैं और हमको,ये ईल्ज़ाम देते हैं।
क्यूँ ख़ुदा से पहले हम,सनम तेरा नाम लेते हैं।।
अग़र ये जुल्म हैं तो'मैं ये ज़ुल्म बार-बार करूँगा।
जिसे देखा नहीं कैसे,तुझसे ज्यादा प्यार करूँगा।
लोग मिलते हैं और हमको,ये ईल्जाम देते हैं।
क्यूँ ख़ुदा से पहले हम,सनम तेरा नाम लेते हैं।
सुनना ज़रा ये ग़ौर से, दिल ज़रा ये थाम के।
रह गयी ख़ुदाई हैं कहाँ, बस ख़ुदा के नाम के।
ऐसी खुदाई से भला हम,आँखों से दिल का पैगाम लेते हैं।
लोग मिलते हैं और हमको,ये ईल्ज़ाम देते हैं।
क्यूँ ख़ुदा से पहले हम,सनम तेरा नाम लेते हैं।।
बड़ी मुश्किल से,ये बात समझ में आई हैं।
चाहत ही ख़ुदा हैं, मोहब्बत ही खुदाई हैं।
पूछ लो उनसे,जो यादों में किसी के जाम लेते हैं।
लोग मिलते हैं और हमको,ये ईल्ज़ाम देते हैं।
क्यूँ ख़ुदा से पहले हम,सनम तेरा नाम लेते हैं।।
हाँ ये सच हैं,मोहब्बत ही ख़ुदा कि नेमत हैं।
मगर ख़ुदा है वही,जहाँ किसी कि मोहब्बत हैं।
या ख़ुदा है वही,जो किसी के मोहब्बत को अंजाम देते हैं।
लोग मिलते है और हमको,ये ईल्ज़ाम देते हैं।
क्यूँ ख़ुदा से पहले हम,सनम तेरा नाम लेते हैं।।
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