तेरे वग़ैर
तुम हो तो तेरे संग,तुझे खोने का भी गम हैं।
तेरे वग़ैर जिंदगी में,थोड़ी मोहब्बत ही तो कम हैं।
मैं खुश हुँ ऐ दोस्त,यहाँ अपने हालात पे।
कुर्बा नही होना,चन्द लम्हों में किये बात पे।
गुजरते वक़्त के साथ ही,ऐसे मंजर हो जाते हैं।
ठोकरे खाकर ही,जो नाजूक है पथ्थर हो जाते हैं।
पथ्थर दिल आदमी भी,भरोसे के कायल होते हैं।
मोहब्बत वो तीर है,एक बार मे ही'कई घायल होते हैं।
जिसे समझता प्यार तु,होता आँखों का भरम हैं।
तुम हो तो तेरे संग, तुझे खोने का भी गम हैं।।
ना समझ तेरे लिए,दिल मे जज़्बात नहीं है।
मग़र जिंदगी दोस्त,सिर्फ चन्द ख्यालात नहीं हैं।
उम्र गुजर जाती हैं, कइयों को रूठने मनाने में।
बड़ी जद्दोजहद हैं, दिल के रिश्ते को निभाने में।
इश्क़ वो दरीया हैं,जहाँ किसी को साहिल नहीं मिलता।
या यूँ कहे जमाने में,कोई इश्क़ के काबिल नहीं मिलता।
दिल की हसरतों में कितने,हो जाते बेदम हैं।
तुम हो तो तेरे संग,तुझे खोने का भी गम हैं।।
तुम जो चाहे भला सोचो,मुझे क्यूँ न गवाँर समझो।
दुनीया की बेगैरीयत को,मग़र तुम ही प्यार समझो।
जिन ख्यालों में तुम जीते हो,उनका हाले-बयाँ क्या जानो।
तुम हो फूलों को मसलने वाले,उनकी महक अदा क्या जानो।
चोट दिल पर है लगती,मिलता नहीं मरहम हैं।
तुम हो तो तेरे संग,तुझे खोने का भी गम हैं।।
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