ख़्वाईश
हैं ख़्वाईश मेरी बस यही दोस्तों,
मिले वो हर जगह,जिस गली से हम निकलें।
ये जिंदगी यूँ ही'कट जाए तो क्या,
मग़र उनकी चौखट पे,मेरा दम निकलें।।
हम महफ़िल हो या मयख़ाने में,
दिखे हर घड़ी वो,हर नजराने में।
वो चेहरा जो मेरी आँखों में हैं,
कहाँ कोई है,इस जमाने में।
वो ख़ुश्बू जो मेरी साँसों में हैं।
मेरी धड़कन में है,वो मेरी बातों में हैं।
था समझा जिसे,हमने अपना मुकद्दर'
उम्मीदों से उनके,हम ही कम निकलें।
हैं ख़्वाईश मेरी बस यही दोस्तों,
मिले वो हर जगह,जिस गली से हम निकलें।
ये जिंदगी यूँ ही'कट जाए तो क्या,
मगर उनकी चौखट पे,मेरा दम निकलें।।
तु खूबसूरत हैं, तुझे बहुत चाहनेवाले मिलेंगे।
मगर मेरे दिल में भी,तेरे अरमानों के फूल खिलेंगे।
हर दुआ में ख़ुदा से,ये दिल तुझे माँगेगा।
मैं चाहूंगा कुछ,और ये कुछ और चाहेगा।
है दिल कि रज़ा, ए सनम सुन ज़रा;
किसी जनम में'तु मेरी भी,हमदम निकलें।
हैं ख़्वाईश मेरी बस यही दोस्तों,
मिले वो हर जगह,जिस गली से हम निकलें।
ये जिंदगी यूँ ही कट जाए तो क्या,
मगर उनकी चौखट पे,मेरा दम निकलें।।
न गिला है तुमसे,न शिकायत हैं सनम।
बस इक ईलतज़ा,इतनी इनायत है सनम।
अगर मोहब्बत में हो गयी हो गलतियां;
तो माफ़ करना,ये तेरी नज़ाकत है सनम।
है अफ़सोस इतना,तुझे चाहा जितना;
तेरी नजरों में उतने ही,बेशरम निकलें।
हैं ख़्वाईश मेरी बस यही दोस्तों,
मिले वो हर जगह,जिस गली से हम निकलें।
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