तन्हाई
जिंदगी गमों के सहारे, चलती रही।
हर कदम पे मुझे, तन्हाइयाँ मिलती रही।।
जिंदगी के राह में, सहारा मिल न सका।
डुबे इस कदर मझधार में,किनारा मिल न सका।
अपनी हालत देखकर,हम बड़ी हैरानी में थे।
लहरों से खेलने वाले,आज खुद ही पानी में थे।
अरमान जो दिल में थे,दिल को ही छलती रही।
जिंदगी गमों के सहारे,चलती रही।
हर कदम पे मुझे,तन्हाइयाँ मिलती रही।।
तुफ़ाँ के साथ हम,साहिल का नजारा करते रहे।
खुदा भी मेरी मौत कि, तारीखें बदलतें रहे।
चाहकर भी हम,कयामत कर न सके।
जो मिला उसको भी,सलामत रख न सके।
ख़्वाब आँखों मे बस,जख़्म बन पलती रही।
जिंदगी गमों के सहारे, चलती रही।
हर कदम पे मुझे,तनहाइयाँ मिलती रही।।
उम्मीदों के बोझ तले,दब से गए।
जब हुए न काबिल तो,हम सब से गए।
कहने को ये मेरी,बस नादानी थी।
यही मेरा बचपना था,मेरी जवानी थी।
जो घड़ी-घड़ी वक़्त के साँचे में ढ़लती रही।
जिंदगी ग़मो के सहारे, चलती रही।
हर कदम पे मुझे,तन्हाइयाँ,मिलती रही।।
न सब्र रहा,न मुझे खुद पे एतबार रहा।
वक़्त पे भी मुझको,न कोई इख्तियार रहा।
क्या पता था जिंदगी,यूँ करवटें बदलेगी;
जोशों-जुनूँ का मुझपे अब,न कोई ख़ुमार रहा।
मंजिलें भी देख मुझे,रास्ता बदलती रही।।
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