बेवफ़ा
बड़े नाजुक मोड़ पे तुम, हमें यूँ छोड़ निकले
कहाँ किस ओर मेरा दिल, तुम तोड़ निकले
बता भी देते तो, संभाल लेते दिल को
अब कैसे सम्भालेंगे,इस मुश्किल को
ना सोचा मेरा क्यूँ,दगा दे गए तुम।
ये कैसी गलती की सजा दे गए तुम।
मैंने तुम्हें यहाँ,बहुत समझा विनम्र,
और दोस्त तुम,यक़ीनन बड़े मुहजोड़ निकले।
बरे नाजुक मोड़ पे तुम, हमें यूँ छोड़ निकले
कहाँ किस ओर मेरा दिल,तुम तोड़ निकले
बड़ा भरोसा था मुझको,तेरे साथ का
मगर अब क्या होगा, मेरे जज्बात का
क्यूँ खेला तुमने यार,भला मेरे दिल से
दिल मिलता है दोस्त, बड़ी मुश्किल से
वो समझ न सके,कभी मेरी दोस्ती को,
जिनसे मिलाई कलाई,कलाई मरोड़ निकले।
बड़े नाजुक मोड़ पे तुम, हमें यूँ छोड़ निकले
कहाँ किस ओर मेरा दिल, तुम तोड़ निकले क्या कहता मै उनको,जो मिलते
पूछते थे तेरे घर का नामो-पता
क्यू हम दोनों अलग से हुए थे
तुम थी गलत या हम थे बेवफा
बड़ी धमक थी तेरी जुदाई में सनम
हर तरफ से तेरी,बेवफाई के ही शोर निकले।
बड़े नाजुक मोड़ पे तुम, हमें यूँ छोड़ निकले
कहाँ किस ओर मेरा दिल, तुम तोड़ निकले
अब हर गम को बताना है मुश्किल
दिल का ये दर्द छुपाना है मुश्किल
जब तोड़ दिया दिल,अपनों ने ही तो'
यहाँ गैरो से दिल लगाना है मुश्किल
उम्मीद करे भी तो किससे सनम जब
नाउम्मीदी के शब्द,हर तरफ,हर ओर निकले।
बड़े नाजुक मोर पे तुम, हमें यूँ छोर निकले
कहाँ किस ओर मेरा दिल, तुम तोर निकले।
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