हालात
बड़ा खुशनसीब था,जब तुम साथ थे।
आज यही बदनसीबी हैं कि,तुम साथ हो।
कल तलक तुमने मेरी,तन्हाइयाँ बाटी थी।
आज तेरी ख़ातिर ही,तन्हा मेरे हालात थे।
मैं समझ न सका,वक्त कि नज़ाकत को।
तेरे चेहरे में छिपी,तेरी शराफत को।
तेरी अदा को,तेरी मुस्कुराहट को।
मैं दाद देता हुँ दोस्त,तेरी हिमाकत को।
जख़्म सारे दिल पे लगे थे,बड़े संगदिल तेरे जज़्बात थे।
बड़ा ख़ुशनसीब था,जब तुम साथ थे।
आज यही बदनसीबी हैं कि,तुम साथ हो।
कल तलक तुमनें मेरी,तन्हाइयाँ बाटीं थी।
आज तेरी ख़ातिर तन्हा,मेरे हालात हैं।।
क्या कहुँ जो तेरे, ये बदले-बदले अंदाज हैं।
न संग चला होता तो न होता,तु जो आज हैं।
आज मुझे ही सिखाता,जिंदगी के मायने हैं।
रिश्ते हैं सीढ़ियां,रिश्तेदार उनके मुहाने हैं।
आ गयी तुझे भी दुनियादारी,कातिल आज तेरे हर बात थे।
बड़ा ख़ुशनसीब था,जब तुम साथ थे।
आज यही बदनसीबी है कि,तुम साथ हो।
कल तलक तुमने मेरी,तन्हाइयाँ बाटीं थी।
आज तेरी ख़ातिर, तन्हा मेरे हालात थे।।
कौन जानता था,इस कदर आदमी बदलते हैं।
तुमसे ही जाना,कैसे वक्त के साँचे में ढलते हैं।
जब वक्त निकल जाए तो'औरों कि क्या बिसात हैं।
जिसने हो साथ दिया,पुछ उसी से'क्या औकाद हैं।
मुझे तेरी जरूरत न थी,तुम्हीं आए बिन मौसम बरसात थे।
बड़ा ख़ुशनसीब था,जब तुम साथ थे।
आज यही बदनसीबी है कि,तुम साथ हो।
कल तलक तुमने,मेरी तन्हाइयाँ बाटीं थी।
आज तेरी ख़ातिर,तन्हा मेरे हालात थे।।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें