ख़्याल

क्यूँ अपनी जिंदगी का,इतना ख़्याल करते हो।
बात मरने कि करते हो,फिर भी सवाल करते हो।
       जिंदा वो भी हैं, जो औरों के ख़्याल रखते हैं।
       जो बोलते नही,वो भी दिल में सवाल रखते हैं।
       ज़रा पूछो उनसे,उनके दिल मे भी अरमान हैं।
       कौन यहाँ कैसे जिया,यही उसकी पहचान हैं।
       बड़ी बेतकल्लुफ़ी से जीते हो,अमा कमाल करते हो।
क्यूँ अपनी जिन्दगी का,इतना ख़्याल करते हो।
बात मरने कि करते हो,फिर भी सवाल करते हो।।
      भला जो पीछे हैं, कैसे यहाँ रास्ता बतायेंगे।
      आगे चलने वाले,पीछे मुड़कर गीर जायेंगे।
      इससे तो अच्छा,तुम बढ़कर हाथ थाम लो।
      जब मिले न मंजील, तो ख़ुदा का नाम लो।
       जिनसे है दुनीया,उनके भी नाम पर बवाल करते हैं।
क्यूँ अपनी जिंदगी का,इतना ख़्याल करते हो।
बात मरने कि करते हो,फिर भी सवाल करते हो।।
       किसी पे मरनेवाले,जिंदगी की दुहाई देते नहीं।
       खुद के कुर्बानीयों पे, खुद ही सफ़ाई देते नहीं।
       अगर तु जिंदा है तो'यहाँ जिंदगी पे यकीन कर।
       सबको दीए हैं ख़ुदा ने,जिंदगी के पल गीनकर।
       फिर हर इक पलों का, क्यूँ न इस्तेमाल करते हो।
क्यूँ अपनी जिंदगी का,इतना ख़्याल करते हो।
बात मरने कि करते हो,फिर भी सवाल करते हो।।
       वो अपना नही था,जो राहों में तुमसे छुट गया।
       फ़िक्र नही ये करना हैं,यहाँ कौन तुमसे रुठ गया।
       उसने तुमको खोया हैं,तुमको शिकायत कैसी हैं।
        मलाल उसे होगा,न मिलेगी'तेरी मोहब्बत जैसी हैं।
        कैसे मोहब्बत में,दिल तोड़ने का मजाल करते हो।
क्यूँ अपनी जिंदगी का,इतना ख़्याल करते हो।
बात मरने कि करते हो,फिर भी सवाल करते हो।।

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