अरमाँ
मैंने देखा है पैसों तले,अरमाँ को कुचलते हुए।
अपने ख्वाबों को,आँसुओ के सहारे निकलतें हुए।।
मिलता नहीं था चैन,नींद आती नही थी रातों को।
दिल दुखता था सुनकर,ज़माने भर कि बातों को।
फिर भी संभालते थे,खुद को दिलाशा देते थे।
मेरे अपने'बनाके तमाशा,मेरा तमाशा देखते थे।
हमने देखा है चंदा कि नरमी से तपते सुरज पिघलते हुए।
मैंने देखा है पैसों तले,अरमाँ को कुचलते हुए।
अपने ख्वाबों को,आँसुओ के सहारे निकलतें हुए।।
कोशिशें होती थी,मगर मिलती नही थी कोई मंजिल।
हर पल हर घड़ी,टुटता रहता था मेरा दिल।
नजरें थकती थी मगर,कदम कभी रुकते नही थे।
बिखरते थे मेरे ख्वाब,पर इरादे टुटते नहीं थे।
घोड़ निराशा में भी देखा हैं,उम्मीदें के दिए जलते हुए।
मैंने देखा है पैसों तले,अरमाँ को कुचलते हुए।
अपने ख्वाबों को,आंसुओं के सहारे पिघलते हुए।।
देखते नही थे दिल,तरस खाते थे मेरे हालात पे।
लोग अक्सर रूठ जाते थे,मेरे कहे हर बात पे।
हालात जैसे हो,मुझे हारना मंजूर न था।
खुद के अरमानों को,खुद मारना मंजूर न था।
भला कैसे रोक सकता था,मैं हसरतों को मचलते हुए।
मैंने देखा है पैसों तले,अरमाँ को कुचलते हुए।
अपने ख्वाबों को,आँसुओ के सहारे निकलतें हुए।।
हो हौसला तो,अक्सर तस्वीर बदल जाती हैं।
मेहनत के दम पर, तकदीर बदल जाती हैं।
कौन कहता है वक्त अच्छा-बुरा होता नहीं।
वक्त के साथ हाथों कि लक़ीर बदल जाती हैं।
और कुछ लोग पा लेते हैं,यूँ ही जिंदगी में चलते हुए।
मैंने देखा पैसों तले,अरमाँ को कुचलते गए।
अपने ख्वाबों को,आँसुओ के सहारे निकलतें हुए।।
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