बदल न जाना तुम।
छू के हवा के झोको-सा,रुख अपना बदल न जाना तुम।
आए हो तो दिल में रहना,चुपके से निकल न जाना तुम।।
खामोश रहा हुँ अक्सर मैं,जबसे बोलना सिखा था।
न उम्मीद थी,न आशा थी,जीने का यही तरीका था।
मै अक्सर बचता रहता था,कोई खेले न जज्बातों से।
तक़दीर भी हार ही जाती है,ए दोस्त बुरे हालातो से।
छेड़ा हैं मेरे जज्बातों को तो'इनको कुचल न जाना तुम।
छेड़ा हैं मेरे जज्बातों को तो'इनको कुचल न जाना तुम।
छू के हवा के झोकों-सा,रुख अपना बदल न जाना तुम।
आए हो तो दिल में रहना,चुपके से निकल न जाना तुम।
न चेहरे में कोई रौनक है,न आँखों में कोई जादू है।
मैं भी एक इंसा हूँ,करूँ क्या'दिल हो जाता बेकाबु है।
भला रोक सके है कौन इसे,दिल तो' एक परिंदा है।
जो छोड़ चुके थे हमको,वो'अब तक यादो में जिंदा है।
बीते एहसास अभी दिल में है,दिल को छल न जाना तुम।
छू के हवा के झोकों-सा,रुख अपना बदल न जाना तुम।
आए हो तो दिल में रहना,चुपके से निकल न जाना तुम।
अपने अरमानो के बगिया का,मैं खुद एक माली हुँ।
हाथ भी मेरे खाली है, दिल से भी खाली-खाली हुँ।
कोई बात नहीं है मन में,एहसास तो दिल को होता है।
जख्म वही देता है अक्सर,पास जो दिल के होता हैं।
तोड़ा है अगर बागों से हमें,हाथो से मसल न जाना तुम।
छू के हवा के झोकों-सा,रुख अपना बदल न जाना तुम।
आए हो तो दिल में रहना,चुपके से निकल न जाना तुम।
ए दिल समझेगा कौन,जब कीमत नहीं जान की।
तू बड़ा मासूम है, यहाँ' क़द्र नहीं, तेरे पहचान की।
अच्छा था जब तन्हा था तू,दुनिया के इस भीर में।
आज भी तू तन्हा ही है,शहद मिलती नहीं नीर में।
मैंने पहले ही कहाँ था,यहाँ बातो में बहल न जाना तुम।
छू के हवा के झोकों-सा रुख अपना बदल न जाना तुम।
आए हो तो दिल में रहना,चुपके से निकल न जाना तुम।।
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