हिसाब
जख़्म दर जख़्म दिए,कहती हो हीसाब कर डाला।
ए सनम तुमने मोहब्बत में,हमें बेनक़ाब कर डाला।।
जैसे थे'जो भी थे,हम ख़ुद से न अंजान थे।
ए सनम तेरी महफ़िल में,कुछ मेरे भी कद्रदान थे।
तुमने हाथ बढ़ाया तो'तुमको ही जिंदगी समझा।
हमने जिसे मोहब्बत समझा,तुने दिल्लगी समझा।
अबतक जो बनाया,उन रिस्तों को खराब कर डाला।
जख़्म दर जख़्म दिए,कहती हो हीसाब कर डाला।
ए सनम तुमने मोहब्बत में,हमें बेनक़ाब कर डाला।।
टुकड़ो में जीया था मैं,बरसों से इस आस में।
अच्छा हुँ या बुरा हुँ,सच्चा दिल तो मेरे पास में।
जो दिल में उतड़कर देखेगा,मेरी कीमत समझेगा।
खा गया मैं धोखा,दिल के रिस्तों के विस्वास में।
हम क्या थे सनम,और तुमने'क्या ज़नाब कर डाला।
जख़्म दर जख़्म दिए,कहती हो हीसाब कर डाला।
ए सनम तुमने मोहब्बत में,हमें बेनक़ाब कर डाला।।
ए सनम मेरे दिल को'तोड़ना आसां न था।
मग़र मुमकिन तेरे लिए,ज़माने में क्या न था।
था हुनर ऐसा कि, धोखा ख़ुदा भी खा बैठे।
जिंदगी कि उम्मीद में,तुम हमें कहाँ ला बैठे।
हम तो थे चन्द पन्नो में सिमटे,तुमने किताब कर डाला।
ज़ख्म दर जख़्म दिए,कहती हो हीसाब कर डाला।
ए सनम तुमने मोहब्बत में,हमें बेनक़ाब कर डाला।।
जब तामीर थी तुझे चेहरे की,
क्यूँ दिल में उतड़कर देखा था।
क्यूँ फिक्र कि मेरी तन्हाइयों की,
मैंने कई बार बिखड़कर देखा था।
टूटे नही थे तब भी सनम,जब दिल से नादान थे।
मग़र तेरी इन हरकतों से हम,आज बड़े हैरान थे।
सीने से लगाया,आँसू पोछें'आँखों में तेजाब धर डाला।
जख़्म दर जख़्म दीए,कहती हो हीसाब कर डाला।
ए सनम तुमने मोहब्बत में,हमें बेनक़ाब कर डाला।।
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