रोया बहुत हैं।


वो हँसता है तो हंस लेने दो यारों,
तन्हाई में छिपकर,रोया बहुत हैं।
यूँ बार-बार खेलों न उसके दिल से,
दिलों में वो अरमाँ,संजोया बहुत हैं।।

       उसकी आँखों में,गमों कि परछाई हैं।
       लगता है सनम उसका भी, हरजाई हैं।
       धोखे भी दिए है,उसने गीले भी दिए हैं।
       गमों के न जाने,कितने सिलसिले दिए हैं।
       तभी तो टुटकर गिर पड़ा है इस कदर,
       गमों का पहाड़,दिल पे ढ़ोया बहुत हैं।
वो हँसता है तो हँस लेने दो यारों,
तन्हाई में छिपकर रोया बहुत हैं।
यूँ बार-बार खेलो न उसके दिल से,
दिलों में अरमाँ,संजोया बहुत हैं।।

        क्या हसरत थी दिल में,क्या हो गया।
        जो हासील किया था,वो भी खो गया।
        कहाँ से लाएगा वो बचपना वो जवानी।
        अब लगती है उसको,ये जिंदगी बेमानी।
        अब गवाने का भी उसको कोई डर नहीं,
        उम्रभर,हर घड़ी, इतना खोया बहुत हैं।
वो हँसता है तो हँस लेने दो यारों,
तन्हाई में छिपकर रोया बहुत हैं।
यूँ बार-बार खेलो न उसके दिल से,
दिलों में अरमाँ संजोया बहुत हैं।।

         कैसे किस कदर उसने,हर इक लम्हें बिताए हैं।
         धोखा इश्क़ में खाया,गम अपनों ने भी ढाए हैं।
         फिर भी उसमें,कुछ करने कि मुराद बाकी हैं।
         आँखों में उसकेे,अभी मंजील की याद बाकी हैं।
         न तोड़ दो ख़्वाब उसके,जागने से पहले,
         इन सपनों कि ख़ातिर,वो सोया बहुत हैं।
वो हँसता है तो हँस लेने दो यारों,
तन्हाई में छिपकर रोया बहुत हैं।
यूँ बार-बार खेलो न उसके दिल से,
दिलों में अरमाँ संजोया बहुत हैं।

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