नज़र

वो इक नज़र में मेरा,क्या से क्या ले गए।
छोड़ के सारी उल्फ़ते,वो दर्दे-बयाँ ले गए।

उनसे मिली नज़र,तो बड़ी मुश्किलें हुई;
मेरे सामने से, मेरा दिल उठा के ले गए।

ले जाना था तो'सब ले जाते चुपके से,
वो मेरा सबकुछ,मुझको ही बता ले गए।

क्या अदा थी यारों,उनके भी लुटने कि,
वो लुटकर मेरा दिल,मुस्करा कर ले गए।

अब फिज़ा में भी,उतनी रँगीनीयत नहीं;
वो सारी खुशबू,सारी ताजी हवा ले गए।

मिले जो इक बार'मत पूछो क्या हुआ,
कुरेद के जख्मों को,उनकी दवा ले गए।

बड़ा मीठा था दर्द,जो उसने दिया था;
मग़र हमसे,दर्द में जीने कि'अदा ले गए।

बड़ी मासुमियत छिपी थी,उनके चेहरें में;
मग़र वो दर्द सारा,सीने में छुपा ले गए।

देखा था पहली बार'उनको बड़ी भीड़ में,
भीड़ से चुराकर,सारी शर्मो-हयाँ ले गए।

शिकवा नही,जो मिले जिंदगी में इक बार;
शिक़वा हैं,जो कई बार मिलकर दगा दे गए।

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