तसवीर


हुस्न चाहत कि काश,कोई जागीर होती।
काश उनकी मेरे पास,कोई तस्वीर होती।।
      याद आती तो तस्वीर, सीने से लगा लेता।
      उनका चेहरा देख,दिल कि प्यास बुझा लेता।
      इस सुने दिल को,जीने का बहाना तो मिलता।
      ढूंढता उनसे मिलता,कोई नजराना तो मिलता।
      अपनी मोहब्बत कि ऐसी,तासीर न होती।
हुस्न चाहत की काश,कोई जागीर होती।
काश उनकी मेरे पास, कोई तस्वीर होती।।
      याद आता है मुझको'उनका हँसना-सँवरना,
      याद आती है मुझको'हर वो नादानी।
      वो मादक अदाएं,जो दिल को निभाए;
      वो फुलों से खिलती,उनकी जवानी।
      जब भी कहता मैं,छोड़ जाओ कोई निशां;
      कहती मेरी यादें ही हैं,मेरे प्यार कि निशानी।
      काश इन हाथों में'उनकी भी,कोई लकीर होती।
हुस्न चाहत कि काश,कोई जागीर होती।
काश उनकी मेरे पास,कोई तस्वीर होती।।
      रोज़ यादों को बुनता हुँ,दिल को भरमाता हुँ।
      अक्श आँखों में लिए, तेरा चेहरा बनाता हुँ।
      मग़र  हर कोशिश बदस्तूर,नाकाम हो जाती हैं।
      तु दिखती भी नहीं,मोहब्बत बदनाम हो जाती हैं।
      इतनी रूठी न मुझसे मेरी तकदीर होती।
हुस्न चाहत कि काश,कोई जागीर होती।
काश उनकी मेरे पास,कोई तस्वीर होती।।
    

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मरहम

सौभाग्य

उन्वान