तुम्हें आना होगा।

जब मौसम में, खामोश हलचल होगी।
जब वादियों में, खुशबु पलपल होगी।
जब समाँ का हर लम्हा, दिवाना होगा।
तब इक बार फिर,मेरी जाँ तुम्हे आना होगा।
         
         हर तरफ जब,सिर्फ तेरी खुशबु होगी।
         जब इस दिल को'तेरी ही आरजू होगी।
दो लम्हा ही मेरे संग,सनम'तुम्हें बिताना होगा।
तब इक बार फिर से,मेरी जाँ तुम्हें आना होगा।
        
        जब मेरे दिल से, यादों कि बारात निकलेगी।
        जमाने भर कि,रुसवाईयाँ कि बात निकलेगी।
तब आकर मेरे दिल को,तुम्हें समझाना होगा।
तब इक बार फिर से,मेरी जाँ तुम्हें आना होगा।
        
        हाँ ये सच हैं, नज़ारे तुझे दोष देंगे।
        मगर मेरी जाँ हम,खामोश ही रहेंगे।
लोगों कि नजरों से खुद को,तुम्हें बचाना होगा।
तब इक बार फिर से,मेरी जाँ तुम्हें आना होगा।।
        
        लोग पुछेंगे तुमसे,गिला भी करेंगे।
        मग़र मेरी ख़ातिर,मिला भी करेंगे।
ज़हमत झेलकर भी,रिस्ता हमसें निभाना होगा।
तब इक बार फिर से'मेरी जाँ तुम्हें आना होगा।
        
        जब दिल में अरमानों के,फुल खिलेंगे।
        दो बिछड़े प्रेमी जिस राह,फिर मिलेंगें।
वही होगी मेरी मंजिल,जहाँ तेरा ठिकाना होगा।
तब इक बार फिर से,मेरी जाँ तुम्हें आना होगा।।

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