मम्मि-पापा
पापा कहते थे---
बुरी आदतें भी हो तो,उसे सरेआम न लो।
हो अरमाँ दिल में तो उसे यूँ न दिल से निकालो।
दोष राहों का सिर्फ नही हैं,ज़रा खुद को संभालो।
हर मुश्किल आसाँ होगी,इन बातों को समझ जाओगे।
न लेना दिल से फैसलें,दिल कि बातों में उलझ जाओगे।
मग़र मैंने हमेशा,पापा कि बातों को दरकिनार किया।
ले लिया दिल से फैसला,हाँ मैंने भी प्यार किया।।।
मत पूछ क्या हुआ, मेरा दिल के मामलें।
फूल बन पड़ा हुँ,उसके घर के सामनें गमलें में।
फिर भी पलटकर,उसने मुझपर न ध्यान न दिया।
इक फुल भी खिला डालियों में,तोड़ अपनी जान को दिया।
और कहा ले लो इसे,अपनी आशिक़ कि क़ब्र से निकाला हैं।
मेरी चाहत में ये हाल हुआ,कभी का ये मेरा चाहने वाला हैं।
मैं खुश हुआ चलो,किसी तरह उसके काम तो आया।
फिर दिल मचल गया,जब उसकी लबों पे नाम आया।।
मम्मी ने कहा था---
जब मुश्किल कि घड़ी हो,
कोई आफ़त पड़ी हो।
तो दिल से काम लेना।
जब दिल से काम लिया-
तो अपने दूर हो गए,हम बड़े मजबूर हो गए।
माँ तेरी इन बातों ने,मुझको खूब रुलाया।
तेरा दिल तो माँ का दिल था,दुनिया को न समझ पाया।
मग़र तेरी-मेरी बातों माँ,बस फर्क इतना था--
जो तुने समझाया,वो माँ कि ममता थी।
जब दिल काम आया था,तो वो लड़की ममता थी।।
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