गज़ल
KaFiya: -SagaR
हर इक ख़्वाईश के लिए,पहल जरूरी हैं।
जिंदगी में ए दोस्त,यहाँ गज़ल जरूरी हैं।
चंद शब्दों में कैसे,खुद को समेटेगा यहाँ,
खुद को तराशे,इक अंतरमहल जरूरी हैं।
फिक्र नही इसकी,यहाँ आबो-हवा कैसी है;
हर इक ख़्वाईश के लिए,पहल जरूरी हैं।
जिंदगी में ए दोस्त,यहाँ गज़ल जरूरी हैं।
चंद शब्दों में कैसे,खुद को समेटेगा यहाँ,
खुद को तराशे,इक अंतरमहल जरूरी हैं।
फिक्र नही इसकी,यहाँ आबो-हवा कैसी है;
लाख कीचड़ हो,खिलता कमल जरूरी हैं।
इश्क़ यहाँ मक़बरों में भी'आज जिंदा हैं;
लोग समझें इसलिए,ताज़महल जरूरी हैं।
भलें तु क़ुरबत से शोहरत की तरफ़ हैं गया,
कद्र रहें बरसों,इन आँखों मे जल जरूरी हैं।
यहाँ बुजुर्गों की नसीयत से रूबरू हो सकें,
चंद किस्सा भी,ए आनेवाली नस्ल जरूरी हैं।
चन्द शायर,कवि थे तभी तुम हो जान सकें,
ख़ुदा भी मिलते है इंसा की शक्ल जरूरी हैं।
मैं अपने शब्दों को तराजू की तरह तौल सकूँ,
मेरे जिंदगी में आया,गमों का पल जरूरी हैं।
इश्क़ यहाँ मक़बरों में भी'आज जिंदा हैं;
लोग समझें इसलिए,ताज़महल जरूरी हैं।
भलें तु क़ुरबत से शोहरत की तरफ़ हैं गया,
कद्र रहें बरसों,इन आँखों मे जल जरूरी हैं।
यहाँ बुजुर्गों की नसीयत से रूबरू हो सकें,
चंद किस्सा भी,ए आनेवाली नस्ल जरूरी हैं।
चन्द शायर,कवि थे तभी तुम हो जान सकें,
ख़ुदा भी मिलते है इंसा की शक्ल जरूरी हैं।
मैं अपने शब्दों को तराजू की तरह तौल सकूँ,
मेरे जिंदगी में आया,गमों का पल जरूरी हैं।
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