अख़बार

तेरी राहों में बिछ जाऊं,तु जो कह दे तो'
तेरी राह में खुद को,यहाँ जाँनिशार कर देंगे।

वो हमसें शब्दों में यूँ,अब समेटा न जाएगा;
जब लिखेंगे उसको,तो'हम अखबार कर देंगे।

अपनी लटों को यूँ चेहरे पर,गिराया न कर,
ये झूलती लटें,मोहल्लें को बीमार कर देंगे।

माना तेरे चेहरे में,सनम' रुबाब बहुत है,मग़र'
हम पैरों की जमीं को भी,गुलजार कर देंगे।

पैसा नही है क्योंकि,कहीं का नौकर नहीं रहा,
जहाँ काम आएंगे सिक्के,क्या दीनार कर लेंगे।

सजाया हुस्न मुझें,सनम अच्छा नहीं लगता,
हम सुर्ख ओठो मे भी,सनम निखार कर देंगे।

मैं आकर सनम दिल से,कभी लौटता नहीं हुँ;
अब जहाँ मिलेंगे वही,अपना घर-बार कर लेंगे।

तु क्या है भला क्या ये तेरे मुंसिफ़ समझेंगे;
चाँद कटता रहेगा और,वो बस दीदार कर लेंगे।

ना जाने जमाने की,नजरों को क्या हुआ है
हर डूबने वाला कहता है दरिया पार कर लेंगे।

चाँद, ख्वाब,उम्र,बच्चे भला नसियत मानेंगे
जो अच्छा लगेगा उसी से वो प्यार कर लेंगे।

नज़रों से बचने की सनम,तरकीब निकालो;
लोग आंखों से ही हुश्न का,बाजार कर लेंगे।

मेरी शिकायत को, अपनी तौहीन न समझ;
हम न बोलेंगे तो लोग,तुझे बेज़ार कर देंगे।

तु समझा कर यहाँ,खुद की अहमियत सनम;
नहीं तो'हर बात पर,लोग सरेेंबाज़ार कर देंगे।

शहर में चल रहा हैं,शायरों का interview,
कुछ लोग उन्हें भी बेचकर, ब्यापार कर लेंगे।

ये हुनर हमें ख़ुदा ने बक्शा,कोई क्या छिनेगा;
 कैसे बोतलों में वो,सागर का जुगार कर लेंगे।

धोखे मिलें है मगर तू सच की राह तो चल।
ख़ुदा यूँ भी अपने बन्दों का,इख्तियार कर लेंगे।

वो काफ़िया,रदीफ़,बहर कुछ नहीं समझता;
इश्क़ हुआ तो कहें है,शायरी दो-चार कर लेंगे।

तुझे मुुबारक हो,ये दुनिया का रंगमहल सनम;
हम शब्दों के दमपर ही,अपनी सरकार कर लेंगे।

फूल की राह में,तो'कांटे हज़ार मिलते है,मग़र'
जो खुद खंजर है उसका क्या तलवार कर लेंगे।

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