तौबा

अपनी जिंदगी की राह में आए,
हर इक दरख्तों-दीवार से तौबा।

कर लिया है अब हमने भी,सनम'
अब इस खुदगर्ज़ी के,प्यार से तौबा।

सब हुआ अपने बीच,उन दिनों में;
बस सिर्फ तुझे था,इजहार से तौबा।

कहने को हर कोई,उन्हें चाँद लगें हैं;
बस घर के चाँद के,दीदार से तौबा।

यहाँ मौसम ही,जब क़ातिल निकले;
फिर क्या फूल से,क्या खार से तौबा।

ग़नीमत हैं,चुनाव वो जीत गए;वर्ना'
कलतक था,उसी सरकार से तौबा।

कोई तुमसे यहाँ,बात बनाना सीखें;
महबूब भी हैं,है मेरे सरोकार से तौबा।









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