बदला

यहाँ हर मोड़ पर,चोट खाएँ मग़र'
न जीने का,कभी हौसला बदला।

कभी फैसलें ने,ये जिंदगी बदली,
है जिंदगी ने,कभी फ़ैसला बदला।

जब किनारों से दोस्ती हो गई तो',
लहरों ने भी,यहाँ है रास्ता बदला।

ज़ख्म इतना ही,दोस्त'कम न था
तुमने आकर,सारा मसला बदला।

मेरे कातिल,तफ़्तीश को आए हैं;
वो ना समझेंगे,है यहाँ क्या बदला।

नब्ज़ खुद की जब,मैं टटोलता हुँ;
मंजील से हर बार,हैं वास्ता बदला।

हर बरसात में,मौसम से जुझता हैं;
भला चिड़ीयें ने कब,घोसला बदला।

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