घर
जहाँ मेरी यादों का,यहाँ बचपन गुज़रा हैं,
चंद पैसों की ख़ातिर,वो घर थोड़े बदलेंगे।
चंद पैसों की ख़ातिर,वो घर थोड़े बदलेंगे।
भले जान के दुश्मन हज़ार,हो जाए यहाँ मेरे'
किसी हाल में'अपना शहर थोड़े बदलेंगे।
सुना हैं,कुछ लोग यहाँ,मेरी आँख निकालेंगे;
हम मजनूँ हैं साहेब,अपनी नज़र थोड़े बदलेंगे।
वो किसी हाल में इस दिल से,निकलता नहीं,
सुना हैं,कुछ लोग यहाँ,मेरी आँख निकालेंगे;
हम मजनूँ हैं साहेब,अपनी नज़र थोड़े बदलेंगे।
वो किसी हाल में इस दिल से,निकलता नहीं,
ज़माने के वास्ते,अपना जिगर थोड़े बदलेंगे।
थोड़ा हौसला सनम,अब तुम भी आज़माओ;
खुदा सिर्फ हमारे लिए,ये मंजर थोड़े बदलेंगे।
तेरी चाह में इस कदर,अब बदनाम हो गए हैं;
तुझें भूल भी जाए,तो'ये ख़बर थोड़े बदलेंगे।
मंजिल का मुन्तजिर हुँ,कोई आवारा नहीं हुँ;
रास्तें के डर से,हम अपना सफ़र थोड़े बदलेंगे।
तकलीफ़ ये हैं,यहाँ फूलों ने मिज़ाज बदला हैं;
वो तो चुभेंगे ही,कम्बख़्त ख़ंजर थोड़े बदलेंगे।
जो सिकंदर थे,नज़र के तलबगार बने बैठे हैं;
हालात इससे भी ज्यादा,बद्दतर थोड़े बदलेंगे।
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