सुकूँ

जो यहाँ मुकद्दर में है,बस वही मिलेगा।
अमीरी की जुगत में हो,सुकूँ नहीं मिलेगा।

ख़्वाब छोटे पालिए,जीने के हीसाब से;
जो गलत लगता हैं,तुमको सही मिलेगा।

बचपन में जिसने,हिस्से की रोटी खिलाई थी,
देखना जिंदगी दौड़ में,वो दूर कहीं मिलेगा।

जब नौकरों के बीच गुजरेगी,जिंदगी तुम्हारी;
तुमको तब लगेगा,बस यहीं जिंदगी मिलेगा।

हमारी बात पर फिर हँसेंगे,ये जमाने वाले;
कहेंगे पागल है,इन राहों पे'मुफ़लशी मिलेगा।

बाबर के घरवाले भी,पकौड़े छानते हैं अब;
ये दौलत हैं,हमेशा होकर' अज़नबी मिलेगा।

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