गुब्बार

 तुम चाहती तो,यक़ीनन प्यार हो जाता।

ये छोटा खिलौना भी,गुब्बार हो जाता।


वज़न वजूद का तौलने से क्या फायदा;

दिल को टटोलती तो इख्तियार हो जाता।


सैकड़ो लोग यहाँ,हजार बातों से क्या हैं,

काश कायदे का,एक ही यार हो जाता।


कीमती लोग सनम,बहुत सस्ते होते हैं,

दिल को समझती तो, ऐतबार हो जाता।


जिंदगी यूँ ही कटती है,कट ही जाएगी;

मगर तेरा मिलना भी,एक बार हो जाता।


सागर यक़ीनन अपनी,गहराइयों को छूता,

तेरा इनकार उस दिन इजहार हो जाता।


दुनिया मेरे शब्दों की,यहाँ तामील करती;

तेरे सायें में,ये पन्ना भी अखबार हो जाता।

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