वहम

 उम्रभर मुझकों यही इक वहम,ढूँढता रहा।

ख़ुद दुखों में रहा,दूसरों का गम ढूँढता रहा।


किया था इस कदर,हमपर' सितम किसी ने;

आदत सी लग गई हैं, मैं सितम ढूँढता रहा।


शायरी मेरी उस दिन,जरूर मुकम्मल हो जाती

उसके दिल मे भी उतरें,वहीं बज़्म ढूँढता रहा।


शिकवा रहा उम्रभर,उनको संगदिल सनम से ;

संगदिल भी मिलें,मैं बस इक सनम ढूँढता रहा।


मोहब्बत कर रहें हैं लोग,यक़ीनन फिराक़ में;

वो मेरे जैसा नहीं हैं,ज़माना हरदम ढूँढता रहा।


किसी के हिसाब से ढ़लना,भला तुम क्या जानों;

मैं उसकी बहाव में रही,जो जम-जम ढूँढता रहा।


कलेजा निकाल कर रख देतें,सिर्फ'कह देने पर;

वही मौत कैसी दें,मुझें रोज बेरहम ढूँढता रहा।

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