पानी
तु मेरे साथ चल,तेरे लहरों को रवानी दूँगा।
किसी दरीया ने कहा हैं,सागर को पानी दूँगा।
भोले अगर फिर से, दिल मेरा छला गया,तो'
फिर न कभी तुझपर,मैं गंगा का पानी दूँगा।
मेरी मर्दानगी का तुझें,सनम अंदाजा नहीं हैं;
जिश्मानी हुआ भी,तो'नस्ल मैं खानदानी दूँगा।
न दौलत हैं,न हम अभी मशहूर हुए है,मग़र'
जो दे न सकें कोई,ईश्क़ में'वो मैं कुर्बानी दूँगा।
ख़ुशबू से कब तलक,तु दिल को बहलाएगी;
आज़माकर देख,मैं स्वाद तुझें जाफ़रानी दूँगा।
खूबसूरती किसी की हो,उम्रभर कहाँ टिकती हैं;
साथ निभाए,मैं तुझें वो' फ़िज़ा आसमानी दूँगा।
कोई झूठा ख़्वाब मैं,दिखाने के काबिल नहीं हुँ;
बस कतरा-कतरा कर,तुझें अपनी जवानी दूँगा।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें