सागर

 फूल शबनम के,छाँव नहीं आएगा।

जा साग़र अब तेरे,गाँव नहीं आएगा।


हालात मुश्किल हैं,सब्र अभी टूटा नहीं;

मेरा ग़ुरूर कभी,तेरे पावँ नहीं आएगा।


रश्क इतना क्यूँ है,तुझें मेरे मिलने से;

क्या मोती लहरों के,बहाव नहीं आएगा।


रोज खेलोगें तुम यहाँ,अगर दिल से;तो'

तुम पथ्थर थोड़े हो,जो घाव नहीं आएगा।

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