जवाब

 इन सुखें हुए फूलों में,गुलाब नहीं आएगा।

अब लगता हैं उनका,जवाब नहीं आएगा।


हम उनके ख़्याल में,यूँ ही जी रहें थे अबतक;

यक़ीनन अब होकर,वो शादाब नहीं आएगा।


नाराज़गी होगी,तो'उम्रभर निभाई जाएगी,

हुई अग़र गलतियाँ,अब'आदाब नहीं आएगा।


रिस्ता कोई भी हो,सौदागिरी का आलम ये हैं;

ईश्क़ हुआ भी,तो'ईश्क़ बेहिसाब नहीं आएगा।


फ़र्ज सभी निभा रहें हैं,यहाँ अपना- अपना;

पतझड़ के मौसम में,कभी सुर्खाब नहीं आएगा।


अब जरूरत हैं,यहाँ'जान लगाकर लड़ने की;

घर की अगर सोचेंगे,तो'इंकलाब नहीं आएगा।


कभी भेजें थे ख़त,हमनें किताबो के बहानें;

जवाब ये आया हैं, की किताब नहीं आएगा।

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