भुलाया

अश्क़ पलकों से जब,उठाया जा सकता हैं।

ये मुमकीन है तुम्हें,भुलाया जा सकता हैं।


मेरे मानिंद जहाँ जी रहें हो, और भी लोग;

बात दिल की वहाँ,बताया जा सकता हैं।


औरतें बेलिबाज,मर्द बेतकल्लुफ़ हो जाए;

साथ रहकर भी,जुर्म ढाया जा सकता हैं।


वो मेरा ख्याल करें,हम उसका ख़्याल रखें;

चन्द रिस्तो को यूँ भी,निभाया जा सकता है।


ईश्वर की मर्जी हो,तो'हर जर्रे में वो दिखता हैं; 

पथ्थर को भी,फूलो से सजाया जा सकता है।


वक़्त के पैबंद है यहाँ,हर कंकड़,हर मोती;

सूरज को भी,रोशनी दिखाया जा सकता है।


ईश्क़ अग़र जुनूँ की हद से,यक़ीनन हो जाए;

बहुत मुश्किल है की,समझाया जा सकता है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मरहम

सौभाग्य

उन्वान