ख़ुमार

ख़ुमार

मेरे दिल में सनम, दर्रे-दीवार होने तक।
अब हम देखेंगे तुझें,सनम प्यार होने तक।

पिलाता है साक़ी,तो'कुछ इस तरह पिला; 
मज़ा आए मुझें,अपने ख़ुमार होने तक।

दिल से यक़ीनन तुम,गर चाहों किसी को,
फ़र्क़ नहीं पड़ता,फिर'दरकिनार होने तक।

फ़ैसला तेरा है,तु कुरेदें या सम्भालें हमें;
बंदा हाज़िर हैं,अब दिले-बीमार होने तक।

उतरकर देखिए,इश्क़ इतना आसाँ न है,
वो आज़माती रहीं है,इख़्तियार होने तक।

मेरी सब्र का तुम्हें,सनम अंदाजा नहीं है;
हमनें तीर को चाहा है,तलवार होने तक।

कोई तो हो,जो उनकी अहमियत समझें;
किसी ख़बर को,यहाँ अख़बार होने तक।

यूँ टूटने को तो'कोई भी,रिस्ता टूट जाता हैं;
मग़र मैंने सम्भाला है,उसमें'दरार होने तक।

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