आबरू
हरा दें मुझकों,तुझको अगर सुकूँ मिलें।
इससे पहलें की,आंखों में मेरे खूँ मिलें।
कुर्बानी तब कोई यहाँ,समझेगा भला;
जब किसी लहू में,उसका भी लहू मिलें।
राह आसान है,मंजिल मुश्किल नहीं हैं;
बसर्ते हौसलें के साथ,तेरा भी जुनूँ मिलें।
अब आदमी में ही होता है,भेड़िया कोई;
ख़ूब परखिए,होकर तभी ज़ुस्तजू मिलें।
हमें जन्नत से सनम,नहीं रखना वास्ता;
जन्नत मिल जाए यहीं,मुझें अगर तू मिलें।
खाम-खाँ जिंदगी बड़ी हो, क्या फायदा;
हो जिंदगी छोटी सही,मग़र आबरू मिलें।
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