टूटने के बाद

 प्यास और बढ़ जाती हैं,लबों से छूटने के बाद।

भला इतना भी कोई टूटता हैं,यहाँ टूटने के बाद।


कसक आज भी सताती है,मुझकों इस बात की;

वो और मासूम लगती थी,मुझसें रूठने के बाद।


अच्छा भला था,मैं यहाँ तेरी मोहब्बत से पहलें;

अब तेरे लोग हाल पूछतें थे,मुझें कुटने के बाद।


सच्चा आशिक़ वही,अक्सर यहाँ माना जाता हैं;

जो और हिम्मत दिखाता है,कालिख़ पुतनें के बाद।


पलकों पर बिठाया था,तुझको ख़ुदा बनाया था;

बस पूछना था,क्यूँ गीर गए,इतना उठने के बाद।


माना साँसों से जुड़ी है,जीवन की हर इक डोर;

हवा भी जालीम लगती है,यहाँ बहुत घुटने के बाद।

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