राम

 होकर भावों से,निष्काम बहुत आयेंगे।

तुम मर्यादा में रहना,राम बहुत आयेंगे।


राह लगें शुलों को,फेंको न सुखें फूलों को,

यादों के खुसबू के,ये काम बहुत आयेंगे।

तुम मर्यादा में रहना, राम बहुत आयेंगे।


अभी  ईश्क़ नया हैं,अभी से टूट गया हैं।

वेदना के बेला के,यहाँ शाम बहुत आयेंगे।

तुम मर्यादा में रहना, राम बहुत आयेंगे।


अबतक जख़्म हरा हैं,समझों ईश्क़ बड़ा हैं।

देख इन्हें तन्हाई में,आराम बहुत आयेंगे।

तुम मर्यादा में रहना,राम बहुत आयेंगे।


तेरे रुकनें तक,सूरज भी नहीं निकलेगा;

मेहनत की राहों में, घाम बहुत आयेंगे।

तुम मर्यादा में रहना,राम बहुत आयेंगे।


बिकने को तैयार हैं,ख्वाबों का रंगमहल;

कुछ पल रुक जातें,तो'दाम बहुत आयेंगे।

तुम मर्यादा में रहना,राम बहुत आयेंगे।


ईश्क़ के खुमारी में,हैं नौकरी की तैयारी में;

शादी की हाँ नहीं कहना,नाम बहुत आयेंगे।

तुम मर्यादा में रहना,राम बहुत आयेंगे।

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