निभाना

बड़े तीरंदाज निकलें,मेरे मोहल्लें के लड़के;

लेकर शोहबत में,सभी को आजमाया गया।


भला कैसे बनातें है यहाँ लोग,हज़ार रिसतें;

हमसें इक ईश्क़,सलीके से न निभाया गया।


शामिल सभी थे,ईश्क़ की मुखबिरी में साहेब;

पहेली दिल की,किसी से न सुलझाया गया।


खबर तो सबकों हुई,मेरा आशियाँ जलनें की;

वक़्त रहतें दिल की आग को,न बुझाया गया।


मेरे घर,मेरे खेत,जिसके चक्कर में गिरवी पड़ें;

हमें उनके बच्चों से ही,हैं मामा बुलवाया गया।

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