ईश्क़

मेरे हर दर्द पे,मुझसें‘जिरह करें।

ईश्क़ करें कोई,तो‘इस तरह करें।


रात तन्हाई में,जो रूठ भी जाए,

शिकवा जगाकर,हर सुबह करें।


भलें प्यार जताना,मालूम न हो ;

झगड़ें-गिलें मुझसें,हर जगह करें।


मेरा चुप रहना भी,सालता हो उसे,

अगर बोलूँ,तो‘ डाँटा,बेवजह करें।


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